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पीएलआई के जरिये बड़ा निवेश

Last Updated- December 11, 2022 | 1:43 PM IST

 उत्पादन-केंद्रित रियायत योजना (पीएलआई) के तहत पात्र कंपनियों द्वारा इस वित्त वर्ष करीब 50,000 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने की संभावना है। यह निवेश एडवांस्ड केमिस्ट्री बैटरी, ऑटोमोबाइल, सौर पैनल जैसे क्षेत्रों से किया जाएगा। इससे वि​भिन्न क्षेत्रों में निर्माण में पूंजीगत खर्च बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रेटिंग एवं शोध एजेंसी इक्रा द्वारा जताए गए आरं​भिक अनुमानों में कहा गया कि वित्त वर्ष 2023 में पीएलआई की पात्र 403 कंपनियां पांच साल में इस योजना के तहत किए जाने वाले अपने कुल निवेश का 12.5 प्रतिशत लगाएंगी।

इक्रा का कहना है कि पिछले पांच साल (वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2021) से देश में औसत निर्माण पूंजीगत खर्च सालाना 4 लाख करोड़ रुपये पर अनुमानित रहा है। इसलिए, वित्त वर्ष 2023 में पीएलआई कंपनियों द्वारा निवेश से वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च 12.5 प्रतिशत होगा।
 इक्रा के अनुसार निवेश में बड़ी तेजी वित्त वर्ष 2024 में दिखेगी। अनुमानों में कहा गया है कि वि​​​भिन्न कंपनियों से पूंजीगत खर्च आधार स्तर पर 1 लाख करोड़ रुपये होगा और यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। पीएलआई कंपनियों द्वारा जताई गई कुल पूंजीगत खर्च की प्रतिबद्धता में इसका योगदान 25 से 37.5 प्रतिशत योगदान है। समान रुझान अगले साल भी बरकरार रहने की संभावना है।

इक्रा के रोहित आहूजा (रिसर्च ऐंड आउटरीज) का कहना है, ‘ज्यादातर पूंजीगत खर्च औसत पांच वर्षीय पीएलआई योजना के पहले तीन साल में किया जाएगा। वित्त वर्ष 2023 में ज्यादातर योजनाएं बंद हो गईं, इसलिए हमें पूंजीगत खर्च 50,000 करोड़ रुपये पर रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2024 में बढ़ जाएगा, जब सेमीकंडक्टर और डिस्पले पैनल पर भी बड़ा निवेश किया जाएगा। हालांकि यदि नई पीएलआई को शामिल किया जाए या मौजूदा योजनाओं पर अ​धिक खर्च किया जाए तो पूंजीगत खर्च बढ़ सकता है।’
 आहूजा का कहना है कि पांच साल के नजरिये से पीएलआई योजना वित्त वर्ष 2023 से देश में निर्माण खर्च में औसत 15-20 प्रतिशत का इजाफा करेगी। 

 एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल, ऑटोमोबाइल, वाहन कलपुर्जे, सोलर पीवी, दूरसंचार नेटवर्किंग, टेक्स्टाइल जैसे पीएलआई संबं​धित क्षेत्र पूरे वित्त वर्ष में पीएलआई योजना में शामिल रहेंगे।

 मोबाइल उपकरणों या आईटी उत्पाद जैसे क्षेत्रों के लिए यह दूसरा वर्ष होगा। हालांकि वित्त वर्ष 2022 में पूंजीगत खर्च मुख्य तौर पर मोबाइल उपकरणों और आईटी उत्पादों से जुड़ा हुआ है और उद्योग के अनुमान के अनुसार यह 5,000 करोड़ रुपये से कम था।

पीएलआई का योगदान 3 लाख करोड़ रुपये के कुल सरकारी व्यय के 80 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक (45 प्रतिशत-सेमीकंडक्टर समेत), वाहन (25 प्रतिशत-एडवांस्ड केमिस्ट्री से समेत)और सोलर पीवी सेल (8 प्रतिशत) पर केंद्रित है। अनुमान है कि इनसे अगले पांच साल में संयुक्त रूप से 40 लाख करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होगा। 
पूंजीगत खर्च के संदर्भ में, इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र का योगदान संपूर्ण पीएलआई निवेश के 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

First Published - October 14, 2022 | 9:42 PM IST

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