वैश्विक ऑटो क्षेत्र की टोयोटा मोटर कोर्पोरेशन की भारतीय सहायक कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स (टीकेएम) अपनी जल्द ही लॉन्च होने वाली कॉम्पैक्ट कार के लिए इंजनों को शुरुआती दौर में उसके विदेशी संयंत्र से निर्यात कर सकती है, जब तक उत्पादन की मात्रा न नफा न नुकसान के स्तर तक नहीं पहुंच जाती।
टीकेएम के बेंगलुरु के पास बिडाडी में लगने वाले संयंत्र में कम से कम सात उसी जगह पर सप्लायर होंगे। कंपनी का अपने सप्लायरों को संयंत्र के पास रखने का विचार है। टाटा मोटर्स की नैनो के लिए सिंगूर संयंत्र में भी इसी तरह का ढांचा अख्तियार किया गया है, जहां विक्रेता मूल संयंत्र की सीमा के आस-पास ही होते हैं।
टीकेएम ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इन सप्लायरों में जरूरत के हिसाब से भारी कलपुर्जे जैसे सीट और कार के लिए अन्य धातु पुर्जे आदि निर्माता शामिल होंगे।’ हालांकि कंपनी विक्रेता पार्क के लिए भूमि क्षेत्र की निश्चित सीमा नहीं बताना चाहती। कंपनी का दूसरा संयंत्र 130 एकड़ से अधिक जमीन पर बनाया जाएगा।
टीकेएम का बिडाडी में मौजूदा संयंत्र, जिसमें सालाना 60 हजार वाहन बनाए जाते हैं, वह 432 एकड़ का एक-चौथाई हिस्सा ही इस्तेमाल करता है। 2010 तक कंपनी का दूसरा संयंत्र शुरू हो जाएगा, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 1 लाख वाहन प्रति वर्ष रहेगी और जिसे बाद में बढ़ाया जा सकेगा। इस संयंत्र के पूरा होने के 3 से 4 वर्ष में कंपनी अपने इस संयंत्र की क्षमता को दोगुना कर सकती है।
जहां कंपनी इस कार के लिए स्थानीय निमार्ताओं से 50 प्रतिशत से भी अधिक कलपुर्जे खरीदेगी। अपनी इस रणनीति के पीछे कंपनी की इस कार को भारतीय बाजार की अन्य कॉम्पैक्ट कारों की तुलना में सस्ती बना सकना है। इस स्तर पर इंजनों का यहां उत्पादन कंपनी के लिए फायदे का सौदा नहीं होगा। कंपनी यहां सिर्फ तभी इंजनों का उत्पादन शुरू कर सकती है, जब उसके वाहनों की संख्या बढ़कर 2.5 लाख प्रति वर्ष हो जाए।
शुरुआत में कंपनी को थाईलैंड या जापान के अपने संयंत्रों से इंजन आयात करने होंगे। ट्रैफिक सुरक्षा पर टोयोटा सुरक्षा शिक्षा कार्यक्रम के दौरान विश्वनाथन ने बताया कि हम आने वाले वर्षों में स्थानीय खरीद को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं ताकि गुणवत्ता और लागत मानकों को पूरा कर सकें।
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स अपनी कॉम्पैक्ट कार के अलावा कंपनी के बेड़े के अन्य मॉडलों के उत्पादन के लिए भी इस नए संयंत्र का इस्तेमाल कर सकती है। विश्वनाथन ने बताया कि ये मॉडल लक्जरी कार सेगमेंट में से नहीं होंगे। टोयोटा-किर्लोस्कर संयुक्त उपक्रम कंपनी अपने बेंगलुरु संयंत्र में फिलहाल इनोवा और सेडान कोरोला का उत्पादन करती है।
टोयोटा-किर्लोस्कर की योजना
कॉम्पैक्ट कार का उत्पादन होगा इस नए संयंत्र में
बेंगलुरु के पास बिडाडी में कंपनी लगाएगी 130 एकड़ जमीन पर संयंत्र
कंपनी संयंत्र में ही भारी कलपुर्जों के कम से कम होंगे सात सप्लायर
नए संयंत्र की प्रारंभिक क्षमता लगभग 1 लाख वाहन प्रति वर्ष होगी