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शीर्ष अधिकारियों के वेतन में बढ़त

Last Updated- December 11, 2022 | 6:43 PM IST

कोविड-19 महामारी के बाद भारत की शीर्ष कंपनियों में प्रबंध निदेशकों, मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) और मोटी रकम पाने वाले लोगों के वेतन में काफी इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ कर्मचारियों के औसत वेतन में जरूर कमी आई है। पिछले दो वर्षों के दौरान भारत में शीर्ष कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारी के वेतन में 2.6 प्रतिशत इजाफा हुआ है। यह वित्त वर्ष 2019 के 11.51 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर 11.81 करोड़ रुपये हो गया। मगर इन कंपनियों में कर्मचारियों का औसत वेतन कोविड महामारी से पूर्व के स्तर की तुलना में अब भी 0.5 प्रतिशत कम है। इन शीर्ष कंपनियों में एक औसत कर्मचारी वित्त वर्ष 2021 में 6.4 लाख रुपये कमा रहा था जो वित्त वर्ष 2019 में 6.44 लाख रुपये था। इसका नतीजा यह हुआ कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में महामारी के दौरान आय में असमानता बढ़ गई।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में मुख्य कार्याधिकारियों एवं औसत कर्मचारियों के वेतन में अंतर बढ़ रहा है। कंपनियों में वेतन-भत्तों आदि पर नजर रखने वाली प्राइमइन्फोबेस डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021 में किसी सीईओ का वेतन 11.81 करोड़ रुपये था जो किसी औसत कर्मचारी 6.4 लाख रुपये की तलना में 184 गुना अधिक था। यह अनुपात वित्त वर्ष 2020 की तुलना में 174.3 गुना और वित्त वर्ष 2019 की तुलना में 179 गुना अधिक है। यह विश्लेषक निफ्टी 100 सूचकांक में शामिल 76 कंपनियों में वेतन के आंकड़ों पर आधरित है। यह विश्लेषण दर्शाता है कि महामारी के बाद किस तरह शीर्ष अधिकारियों की वेतन संरचना बदल गई और यह सामान्य कर्मचारियों की तुलना में कई गुना बढ़ गई। पिछले वर्षों की तुलना में ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
शीर्ष प्रबंधन और नियमित कर्मचारियों की कमाई का अंतर तो और कई गुना बढ़ गया है। हमारे नमूने में सर्वाधिक वेतन-भत्ते पाने वाले अधिकारी औसत कर्मचारियों की तुलना में 1,000 गुना अधिक रकम समेट रहे थे। कम से कम एक या दो कंपनियों तो यह रुझान प्रत्येक वर्ष देखा जा रहा है।
डिवीज लैब में आय में असमान सर्वाधिक दिखी। कंपनी में मुख्य कार्याधिकारी का वेतन वित्त वर्ष 2021 में 80.84 करोड़ रुपये था, जो कंपनी में सामान्य कर्मचारियों के वेतन की तुलना में 1,800 गुण अधिक है। इसके बाद विप्रो का नाम आता है। कंपनी में मुख्य कार्याधिकारी का वेतन वित्त वर्ष 2021 में 64.35 करोड़ रुपये था जो औसत कर्मचारियों के वेतन की तुलना में 896 गुना अधिक था। इसके बाद हीरो मोटोकॉर्प में भी बड़ा अंतर दिखा जहां मुख्य कार्याधिकारी का वेतन वित्त वर्ष 2021 में 86.93 करोड़ रुपये था जो कर्मचारियों के औसत वेतन 10.52 लाख रुपये की तुलना में 826 गुना अधिक था। बैंकों में शीर्ष अधिकारियों और सामान्य कर्मचारियों के बीच वेतन में असमानता सबसे कम है। किसी बैंक के सीईओ वेतन वित्त वर्ष 2021 में 5.51 करोड़ रुपये था जो कर्मचारियों के औसत वेतन से 91 गुना अधिक था। वित्त वर्ष 2021 में बैंकों के अलावा बीमा, सीमेंट और औद्योगिक कंपनियों में भी वेतन असमानता कम रही।

First Published - May 26, 2022 | 12:25 AM IST

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