रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की बीएसईएस लिमिटेड की ओर से 50 लाख स्मार्ट मीटर के लिए जारी निविदा में करीब 18 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
बीएसईएस स्मार्ट मीटर की निविदा के तहत अभिरुचि पत्र (ईओआई) दौर में आगे आने वाली कंपनियों में एचपीएल, सिक्योर मीटर्स, अदाणी ट्रांसमिशन, एलऐंडटी आदि शामिल हैं। इसमें दिलचस्पी दिखाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में फिनलैंड की कंपनी वायरपास, फ्रांस की कंपनी ईडीएफ, इटली की कंपनी एनेल, जर्मनी की कंपनी बॉश एवं इट्रॉन और अमेरिका की कंपनी एक्सेलरॉन शामिल हैं।
बीएसईएस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की एक प्रमुख बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) है। उसने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि वह अपने निर्धारित क्षेत्रों में 50 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित करेगी। कंपनी ने 4,000 करोड़ रुपये के स्मार्ट मीटर खरीदने के लिए निविदा जारी की है।
बीएसईएस के पास दो डिस्कॉम- बीएसईएस राजधानी लिमिटेड और बीएसईएस यमुना लिमिटेड- का स्वामित्व है। वह दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वी दिल्ली में इनका परिचालन करती है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्मार्ट मीटर उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे जहां बिजली की अधिक खपत होती है और अधिक उपभोक्ता हैं।
कंपनी का लक्ष्य स्मार्ट मीटर स्थापित करने की प्रक्रिया को इस साल अक्टूबर तक शुरू करते हुए उसे मार्च 2025 तक पूरा करना है। फिलहाल पांच राज्यों में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के कार्यक्रम चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने 11.55 लाख मीटर, बिहार ने 8.7 लाख मीटर, राजस्थान ने 5.5 लाख मीटर, हरियाणा ने 4.52 लाख मीटर और असम ने 2.83 लाख मीटर स्थापित किए हैं।
स्मार्ट मीटर में एक मोडेम (संचार उपकरण) और एक रिमोट स्विच होता है जिसके द्वारा मांग, आपूर्ति और बिलिंग की निगरानी की जाती है। उसे दूर से ही नियंत्रित किया जा सकता है। स्मार्ट मीटर से डेटा क्लाउड सर्वर में एकत्र किया जाता है। यह ऊर्जा की चोरी पर लगाम लगाने में मदद करता है। साथ ही इससे बिलिंग और बिल संग्रह में भी सुधार किया जा सकता है। यह डिस्कॉम को उपभोक्ता मांग पैटर्न का डेटा तैयार करने में भी मदद करता है जिसका उपयोग आपूर्ति की योजना बनाने के लिए किया जा सकता है।
बीएसईएस द्वारा स्थापित किए जाने वाले स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में स्विच करने का विकल्प प्रदान करेगा।
कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि यह लोड पूर्वानुमान एवं शेड्यूलिंग, मांग प्रबंधन और लोड प्रबंधन के साथ अक्षय ऊर्जा के एकीकरण में भी मदद करेगा।