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स्वदेशी मंकीपॉक्स टीका लाएगा भारत

Last Updated- December 11, 2022 | 4:30 PM IST

  भारत अपना स्वदेशी मंकीपॉक्स टीका बनाने के लिए लगभग पूरी तरह से तैयार है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के टीका निर्माताओं सहित कई कंपनियों ने टीके तैयार करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ साझेदारी करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) जैसी कुछ कंपनियां टीका तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ गठजोड़ करने के विकल्पों का आकलन भी कर रही हैं। एसआईआई के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था कि इसने कुछ टीके बनाने के लिए एमआरएनए टीके की तकनीक वाली अमेरिका की कंपनी ग्रीनलाइट बायोसाइंसेज के साथ करार किया है। पूनावाला ने कहा, ‘हम उनके साथ मिलकर मंकीपॉक्स टीके पर भी कुछ करने पर विचार कर रहे हैं। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके लिए अभी कुछ समय लगेगा।’
एसआईआई मंकीपॉक्स टीके बनाने के लिए अपने विकल्पों का आकलन कर रही है। इस बीमारी से पहले ही 90 से अधिक देशों में वैश्विक स्तर पर 38,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। चिंता का विषय यह है कि 85 से अधिक देशों ने 2022 से पहले कभी भी मंकीपॉक्स के प्रयोगशाला में पुष्ट मामलों की सूचना नहीं दी थी और यह बीमारी ज्यादातर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर देखी गई थी।
एसआईआई ने इस साल मार्च में ग्रीनलाइट के साथ तीन एमआरएनए उत्पाद डिजाइन करने के लिए करार किया है, जिसमें दाद-खुजली के लिए भी टीका शामिल है। एसआईआई के पास दो अतिरिक्त टीके या इलाज के लक्ष्यों में विस्तार का विकल्प है। इस बीच, भारत में एसआईआई उन कंपनियों में से एक है जिसने मंकीपॉक्स टीका बनाने के लिए आईसीएमआर के साथ सहयोग करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि कंपनी ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की।
आईसीएमआर का राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे पहले ही मंकीपॉक्स वायरस स्ट्रेन को अलग-थलग करने में सफल रहा है, जैसा कि उसने सार्स-सीओवी -2 महामारी के समय किया था। हैदराबाद की इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स और मुंबई की हाफकिन रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी सरकारी क्षेत्र की कंपनियां भी मंकीपॉक्स टीका बनाने की होड़ में जुट गई हैं। सूत्रों से संकेत मिलता है कि रूस के टीके स्पूतनिक वी कोविड-19 टीके के लिए भारतीय भागीदार कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) भी मैदान में है। डीआरएल ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है।
कई उद्योग सूत्रों ने संकेत दिया कि कंपनियां अब केंद्र से यह संदेश मिलने का इंतजार कर रही हैं कि चीजों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आईसीएमआर ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है कि वह किस कंपनी के साथ साझेदारी करेगा, और अब अभिरुचि पत्र (ईओआई) की जांच कर रहा है। यह साझेदार कंपनी से 5 प्रतिशत रॉयल्टी लेगा जबकि टीका बनाने वाली कंपनी क्लिनिकल परीक्षण करने के साथ ही टीका बनाने और इसके कारोबार के लिए जिम्मेदार होगी।
महाराष्ट्र सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया कि हाफकिन एक निष्क्रिय वायरस वाले मंकीपॉक्स टीके का विकल्प चुन सकती है। इसके पास क्लीनिकल परीक्षण के लिए संसाधन हैं, हालांकि अभी तक बीएसएल -3 स्तर की विनिर्माण सुविधा नहीं है।
हाफकिन, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन बनाने के लिए बीएसएल-3 स्तर की विनिर्माण सुविधा तैयार कर रही थी जिसे अब मंकीपॉक्स टीका बनाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। कई कोशिशों के बावजूद इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका। फिलहाल, डेनमार्क की बवेरियन नॉर्डिक एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसके पास जिनीयोस नाम का मंकीपॉक्स टीका है। हालांकि, कंपनी पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह अपने टीके के निर्माण के लिए कई भागीदारों से बात कर रही है, क्योंकि उसे वैश्विक मांग पूरी करने को लेकर अनिश्चितता की आशंका है।
यह अपने कोपेनहेगन की साइट पर टीके की लगभग 3 करोड़ सालाना खुराक बना सकती है और यह पहले ही अमेरिका को टीकों की आपूर्ति कर चुकी है। यह अपनी स्थापित क्षमता के विस्तार और आउटसोर्सिंग विनिर्माण पर भी काम कर रही है। भारत जिनीयोस टीके के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि इसमें बेहतर क्षमता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पिछले महीने मंकीपॉक्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। इस हफ्ते इसने संकेत दिया है कि इस प्रकोप से पहले मंकीपॉक्स टीका जिनीयोस से जुड़े सीमित मानव डेटा हैं और टीकाकरण कराने वाले लोगों के बीच सफलता के मामले पहले से ही दर्ज किए गए हैं।
 

First Published - August 19, 2022 | 11:04 AM IST

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