प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा जुर्माना लगाए जाने के मामले में कहा है कि भारतीय डेवलपरों को ऐंड्राॅयड और गूगल प्ले द्वारा प्रदान की गई तकनीक और लचीलेपन से लाभ हुआ है। सीसीआई ने गूगल पर प्ले स्टोर की नीतियों के संबंध में प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करने के मामले में दूसरी बार जुर्माना लगाया है।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि भारतीय डेवलपरों को उस प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, उपभोक्ता सुरक्षा और लचीलेपन से लाभ हुआ है, जो एंड्रॉयड और गूगल प्ले प्रदान करता है। कंपनी ने कहा कि लागत कम रखते हुए इसके मॉडल ने भारत में डिजिटल परिवर्तन और करोड़ों भारतीयों तक अपनी पहुंच को सफल बनाया है। कंपनी अपने उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के लिए प्रतिबद्ध हैं और अगले चरणों का मूल्यांकन करने के निर्णय की समीक्षा कर रही है।
सीसीआई ने मंगलवार को एक सार्वजनिक बयान जारी कर गूगल पर करीब 937 करोड़ रुपये के जुर्माने की घोषणा की। सीसीआई ने गूगल से ऐप डेवलपर्स को तीसरे पक्ष की बिलिंग या भुगतान प्रसंस्करण सेवाओं का उपयोग करने से प्रतिबंधित नहीं करने के लिए भी कहा है।
यह जुर्माना 1,338 करोड़ रुपये के उस जुर्माने के बाद लगाया गया है, जो सीसीआई ने गूगल पर एंड्राॅयड मोबाइल डिवाइस के मामले में कई बाजारों में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करने और अधिनियम की धारा 4 का उल्लंघन करने के लिए लगाया था। सीसीआई ने गूगल के खिलाफ किसी विशेष गतिविधि में शामिल होने से रोकने के निर्देश भी दिए हैं, जिसमें उसे अनुचित व्यवसाय करने से रोका गया। इसके साथ ही तकनीकी दिग्गज कंपनी को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी नीतियों को संशोधित करने का निर्देश दिया गया है।
सीसीआई ने आवश्यक वित्तीय विवरण और सहायक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए गूगल को 30 दिन का समय दिया है।गूगल को दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा विरोधी नियामक प्राधिकरण की आंच झेलनी पड़ रही है और तीसरे पक्ष की बिलिंग प्रणाली को अनुमति नहीं देने की अपनी नीति के लिए दुनिया भर के डेवलपरों की ओर से भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
इस साल मार्च में गूगल ने एक पायलट कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी जो कुछ डेवलपरों को गूगल प्ले की बिलिंग प्रणाली के साथ-साथ एक अतिरिक्त बिलिंग प्रणाली की पेशकश करने की अनुमति देता है। ऐसा ही कदम ऐपल पहले उठा चुकी है। कंपनी ने कहा कि इस मूल्य निर्धारण मॉडल बदलाव के कारण, 99 फीसदी डेवलपर अपने ऐप स्टोर पर 15 फीसदी या उससे कम के सेवा शुल्क के लिए पात्र होते हैं।