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भारत की उत्खनन कंपनियां निकालेंगी अब कनाडा का तेल

Last Updated- December 07, 2022 | 5:05 AM IST

भारत में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए उत्खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां अब कनाडा में तेल उत्खनन का कार्य शुरू करने की योजना बना रही हैं।


रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी)और एस्सार ऑयल समेत भारतीय उत्खनन कंपनियां कनाडा के अलबर्टा में तेल उत्खनन का कार्य शुरू करेगी। इसके लिए कंपनियों ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही कंपनियां विदेशी कंपनियों  के साथ करार के मौके भी तलाश रही हैं।

जबरदस्त तेल भंडार

सऊदी अरब के बाद अलबर्टा में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के बाद यहां भी तेल उत्खनन का कार्य शुरू किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यहां उत्खनन कार्य शुरू करने में इसकी लागत लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल आएगी।

सूत्रों के मुताबिक अगर कंपनियां यहां उत्खनन कार्य शुरू कर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर ही तेल बेचती हैं, तो उत्खनन कंपनियों को मोटा मुनाफा होने की उम्मीद है। एस्सार के प्रवक्ता ने  कहा, ‘एक कंपनी होने के नाते हम अपने क्षेत्र में हमेशा ही विकास की संभावनाएं तलाशते रहते हैं। किसी खास परियोजना पर टिप्पणी करना हमारा काम नहीं है।’ लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।

तेल उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘वैश्विक तेल उत्खनन कंपनियों के कर्मचारी ज्यादा वेतन की पेशकश के कारण पहले ही कनाडा जाना शुरू कर चुके हैं। भारत से ही लगभग 400 कर्मचारियों ने कनाड़ा में अच्छा ऑफर मिलने के बाद भारत में अपनी नौकरी छोड़ दी है। जैसे ही वहां उत्खनन कार्य शुरू हो जाएगा इस संख्या में भी अच्छा खासा इजाफा होने की उम्मीद है।’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के कारण इस तेल क्षेत्र से उत्खनन करना काफी फायदेमंद रहेगा। इसीलिए छोटी उत्खनन कंपनियों ने भी अपनी उत्खनन क्षमता बढ़ानी शुरू कर दी है। अमेरिका और यूरोपीय बाजार में सैंड ऑयल के इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए भारतीय और चीनी  तेल उत्खनन कंपनियां भी कमर कस रही हैं।

हाल ही में अमेरिका में हुए एक पर्यावरण शोध के मुताबिक इस क्षेत्र में उत्खनन कार्य शुरू होते ही अमेरिका की सैंड ऑयल उत्पादन क्षमता रोजाना 19 लाख बैरल और बढ़ जाएगी। जबकि कनवेन्शनल ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों की क्षमता रोजाना 3 लाख बैरल तक घट जाएगी।

सैंड ऑयल खतरनाक

सैंड ऑयल की रिफाइनिंग से सल्फर डाईऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती है। तेल उत्खनन काफी महंगी प्रक्रिया होती है। अनुमान के मुताबिक उत्तरी अलबर्टा में लगभग 179 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है।  सऊदी अरब में 264 अरब बैरल का तेल भंडार है।

First Published - June 12, 2008 | 11:39 PM IST

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