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इंपीरियल पर भारत का राज!

Last Updated- December 07, 2022 | 6:48 PM IST

ब्रिटेन की तेल-गैस उत्खनन कंपनी इंपीरियल एनर्जी ने कहा कि उसने चीन की प्रतिस्पर्धी कंपनी साइनोपेक की बजाय ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) को अधिग्रहण की बातचीत के लिए चुना है।


इंपीरियल एनर्जी ने बताया कि ओवीएल ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहयोगी कंपनी जरपेनो लिमिटेड के जरिए 12.50 पाउंड प्रति शेयर के आधार पर अधिग्रहण की पेशकश की है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि इंपीरियल एनर्जी, ओवीएल के साथ 1,250 पेंस प्रति शेयर के आधार पर (नकद रकम में) संभावित अधिग्रहण के मामले को अंतिम स्वरूप दे रही है, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। 

इंपीरियल एनर्जी के कार्यकारी अध्यक्ष पीटर लेवाईन ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज से कहा कि इंपीरियल एनर्जी का निदेशक मंडल ओवीएल के साथ समझौता करके खुश है और शेयरधारकों को प्रस्तावित पेशकश की सिफारिश एकमत से करना चाहता है।

ओवीएल के प्रबंध निदेशक आर एस बुटोला ने कहा कि इस अधिग्रहण ओवीएल के परिचालन में महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ेगा और हमें विश्वास है कि ओवीएल की वित्तीय शक्ति और तकनीकी विशेषज्ञता से तम्स्क क्षेत्र की कारोबारी संभावना आकर्षक तौर पर बढ़ेगी। ओवीएल की पेशकश के मुताबिक, कंपनी का मूल्यांकन 1.4 अरब पाउंड है। इस घोषणा के बाद इंपीरियल एनर्जी का शेयर 7 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

गौरतलब है कि ओवीएल, सरकारी स्वामितत्व वाली कंपनी ओएनजीसी की विदेशी निवेश शाखा है और उसने पिछले महीने अधिग्रहण की पेशकश की थी। उसके बाद इस महीने की शुरुआत में चाइना पेट्रोलियम ऐंड केमिकल कॉरपोरेशन (साइनोपेक) ने भी अधिग्रहण में रुचि दिखाई थी।

इंपीरियल तेल एवं गैस कंपनी है, जिसका मुख्यालय ब्रिटेन में है और रूस के पश्चिमी साइबेरिया स्थित तम्स्क क्षेत्र और कजाकिस्तान के कस्तानिया में उसके तेल उत्पादन ब्लॉक हैं। इंपीरियल ने दिसंबर 2007 में 10,000 बैरल दैनिक तेल का उत्पादन किया था और वह 2011 तक इस मात्रा को बढ़ाकर 80,000 बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। इंपीरियल का रूस में पंजीकृत भंडार करीब 45 करोड़ बैरल हाइड्रोकार्बन है।

अब ओवीएल की बारी

ब्रिटेन की कंपनी इंपीरियल एनर्जी को खरीदेगी ओएनजीसी
अधिग्रहण की दौड़ से चीन की कंपनी साइनोपेक  बाहर

First Published - August 27, 2008 | 12:15 AM IST

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