उद्योग

विदेश जाने का क्रेज कम हुआ? चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए

विदेश जाकर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की संख्या 11.6 प्रतिशत घट गई, जबकि एआई और शोध प्रतिभाओं की वैश्विक मांग बरकरार है

Published by
शिवानी शिंदे   
Last Updated- June 17, 2026 | 8:10 AM IST

अधिक हुनरमंद लोगों के बाहर जाने की रफ्तार वर्ष 2025 में काफी कम हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश से बाहर जाकर काम करने वालों की संख्या 37 लाख से घटकर 33 लाख रह गई। यानी इसमें 11.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और पिछले साल की तुलना में लगभग 4,30,000 कम लोग दूसरी जगह गए।

विशेष विधाओं में दखल रखने वाले विशेषज्ञों के मामले में यह कमी सबसे अधिक कमी देखी गई। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की रिपोर्ट ‘बीसीजी टॉप टैलेंट ट्रैकर, क्यू 2 2026’ के मुताबिक विज्ञान, तकनीक, अभियांत्रिकी और गणित (एसटीईएम) क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या 13 प्रतिशत, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में 12 प्रतिशत और शोध पेशवर में 19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, ऐसे लोगों की आवाजाही कम जरूर रही है मगर जो पेशेवर दूसरी जगह जा रहे हैं का (खासकर एआई में महारत रखने वाले) उनके लिए प्रतिस्पर्द्धा काफी बढ़ गई है।

बीसीजी में प्रबंध निदेशक एवं पार्टनर (इंडिया लीडर – ग्लोबल एडवांटेज प्रैक्टिस) अभिषेक भाटिया ने कहा,‘दुनिया भर में तेजी से बदलती आप्रवासन नीतियों के बीच वैश्विक प्रतिभाओं में कमी के बावजूद भारत हर बड़ी प्रतिभा श्रेणी में एक अहम भूमिका निभा रहा है। कुल मिलाकर सुस्ती के बावजूद अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब जैसे आकर्षक देश वैश्विक प्रतिभा को अपनी ओर खींचते रहते हैं क्योंकि उनके ढांचे में अधिक मौके और आकर्षक वेतन मिलते हैं।’

उन्होंने कहा कि भारत से स्टेम, एआई और शोध प्रतिभा समेत अन्य कुछ अन्य क्षेत्रो में सबसे अधिक पेशेवरों का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा,‘संगठनों को प्रतिभाओं और प्रतिभा विकास को को प्राथमिकता देना जारी रखना होगा। इसके साथ ही वैश्विक प्रतिभाओं से बहुत अधिक हुनरमंद पेशेवरों को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने के लिए अपनी सेवाओं का सही मूल्यांकन करना होगा।’

बीसीजी के खास ट्रैकर के ताजा संस्करण में 22.1 करोड़ बहुत कुशल पेशेवर (यानी कम से कम स्नातक उपाधि वाले लोग) के वास्तविक समय में आवाजाही का विश्लेषण किया गया है। इसमें 200 से अधिक जगहों पर वर्ष 2025 के आखिर तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं। इस संस्करण में शोध प्रतिभा (रिसर्च टैलेंट) नाम से एक नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। इसमें डॉक्टरेट (पीएचडी) डिग्री वाले लोग शामिल हैं जो गतिशील प्रतिभाओं में सबसे अधिक पढ़े-लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह बताते हैं कि भविष्य में विज्ञान और नवाचार पर कहां सबसे ध्यान दिया जाएगा।

बीसीजी में पार्टनर एवं सहायक निदेशक और रिपोर्ट के सह-लेखक जोहान हार्नोस ने कहा,‘मुख्य आंकड़ों के पीछे कुछ अधिकअहम बातें छिपी हैं।’ उन्होंने कहा कि सख्त आप्रवासन नीति के बावजूद अमेरिका दक्ष, एसटीईएम और शोध प्रतिभा के मामले में अपनी बढ़त बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि मगर एआई के मामले में ऐसा नहीं है।

पुराने प्रतिभा केंद्रों की कम हुई चमक

ये बदलाव चौंकाने वाले हैं। कनाडा कभी उच्च कौशल वाले लोगों के लिए शीर्ष तीन देशों में से एक था मगर अब यह सातवें स्थान पर खिसक गया है। इसने प्रमुख देशों में एक साल में हिस्सेदारी में सबसे बड़ी गिरावट (-2.1 प्रतिशत अंक) दर्ज की है। ब्रिटेन ने काफी अधिक हुनरमंद, एआई और शोध श्रेणी में शीर्ष तीन में अपनी जगह बनाए रखने के बावजूद सभी प्रतिभा समूहों में अपनी स्थिति गंवाई है। भारत उन कुछ प्रमुख देशों में से एक है जिसने इन सभी चार प्रतिभा श्रेणियों में अपनी स्थिति मजबूत की है।

First Published : June 17, 2026 | 8:10 AM IST