उद्योग

कच्चे तेल में भारी गिरावट के बाद बदली तस्वीर, OMCs का घाटा हुआ कम

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल में गिरावट, पेट्रोल और डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों का नुकसान घटा

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- June 16, 2026 | 8:09 AM IST

कच्चे तेल के दाम में तेज गिरावट के बाद देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर होने वाला नुकसान अब कम हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट आई है।

पेट्रोल की बिक्री पर सरकारी तेल विपणन कंपनियों का नुकसान 15 जून को आधा होकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गया। महज एक सप्ताह पहले इन कंपनियों को प्रति लीटर 6 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। डीजल पर नुकसान घटकर 27 रुपये प्रति लीटर रह गया जबकि 8 जून को यह आंकड़ा 30 रुपये प्रति लीटर था।

इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि रसोई गैस (एलपीजी) पर नुकसान 700 रुपये प्रति सिलिंडर ही बना हुआ है। 15 जून को मानक ब्रेंट की कीमतें 5 प्रतिशत गिरकर 82 डॉलर प्रति बैरल रह गईं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की उम्मीदें बढ़ गईं।

शर्मा ने कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता सफल रहता है तो इस अशांत इलाके से भारत की ऊर्जा आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद काफी बढ़ जाएगी। कच्चे तेल की कम कीमतें भारतीय तेल शोधक कंपनियों (रिफाइनरी) के लिए बहुत अच्छी खबर हैं। ये कंपनियां फिलहाल कच्चे माल पर ऊंची लागत से जूझ रही हैं।

भारतीय खुदरा तेल विक्रेताओं ने 15 मई से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाला नुकसान कम करने के लिए पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 7.52 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। मई में सरकारी कंपनियों ने चार साल में पहली बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की थी क्योंकि उन्हें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलिंडर की बिक्री पर हर दिन उन्हें 1,000 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा था। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है।

सरकार ने औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को खुदरा पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट) से ईंधन खरीदने के खिलाफ चेतावनी भी दी है। डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में 40 रुपये प्रति लीटर के अंतर के कारण ग्राहक रिटेल आउटलेट की ओर रुख कर रहे हैं। शर्मा ने बताया कि मई 2026 में कुल डीजल बिक्री में थोक डीजल की हिस्सेदारी एक साल पहले के 12.6 प्रतिशत से घट कर 8.3 प्रतिशत रह गई है।

 

First Published : June 16, 2026 | 8:09 AM IST