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एक्सॉन अधिग्रहण से इन्फोसिस होगी और मजबूत

Last Updated- December 07, 2022 | 6:47 PM IST

देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज आईटी कंपनियों में अगुआ बनने की तैयारी में है। वैसे यह कंपनी अधिग्रहण और विलय की दौड़ में धीमी रफ्तार से चल रही है।


पिछले तीन दशकों में एक्सॉन ग्लोबल का अधिग्रहण इसका सिर्फ तीसरा सौदा होगा। भारतीय आईटी कंपनियों को आईबीएम, एचपी, एक्सेंचर और केपजेमिनी जैसी वैश्विक आईटी कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। एचपी ने हाल ही में ईडीएस को खरीदा है।

ये सभी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनियां वैश्विक डिलीवरी मॉडल और कौशल संबंधी परामर्श आदि के लिए जानी जाती हैं जो बड़े सौदों के लिए बेहद जरूरी होता है। विश्लेषकों का मानना है कि एक्सॉन सौदा इन्फोसिस के लिए ‘राइट-साइज्ड’ और संभवत: ‘राइट प्राइस्ड’ है। वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद इस सौदे से इन्फोसिस के परामर्श व्यवसाय में मजबूती आने की उम्मीद है।

एक ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि यह अधिग्रहण इन्फोसिस के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। कंसल्टिंग फर्म आम तौर पर अपने राजस्व का आकलन तीन गुना करती हैं, लेकिन बाजार में मंदी के कारण यह राजस्व स्तर घट कर दोगुना रह गया है।

एक्सॉन में 2000 कर्मचारी काम करते हैं। इसका राजस्व 1660 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा तकरीबन 160 करोड़ रुपये का है। कंपनी का कैश रिजर्व तकरीबन 205 करोड़ रुपये है और इसके 200 से अधिक ग्राहकों में बीपी, जेरॉक्स और पीएसएल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।

कंपनी अपना 55 फीसदी राजस्व यूरोप और 40 फीसदी राजस्व अमेरिका से प्राप्त करती है। कंपनी अतीत में वहां अधिग्रहण प्रक्रिया को भी अंजाम दे चुकी है। मलेशिया में भी कंपनी का डिलीवरी सेंटर है। इन्फोसिस के एसएपी कारोबार से तकरीबन 2100 कंसल्टेंट जुड़े हुए हैं। इसके एसएपी क्षेत्र का एंटरप्राइज सॉल्युशन राजस्व में एक-तिहाई का योगदान है। इन्फोसिस का 10 फीसदी राजस्व एंटरप्राइज सॉल्युशन से आता है।

एसएपी क्षेत्र में 20 देशों में कंपनी के 100 से अधिक ग्राहक हैं। इस सौदे से इन्फोसिस के कंसल्टिंग कारोबार को एक नई मजबूती मिलेगी।  इस व्यवसाय में उछाल आने से इन्फोसिस को वैल्यू चेन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और इससे इसके मार्जिन में इजाफा होगा। एक्सॉन का तकरीबन 20 फीसदी राजस्व हाई-ऐंड कंसल्टिंग और बाकी राजस्व एसएपी सेवाओं से आता है।

इस अधिग्रहण से इन्फोसिस को अपना मार्जिन 15 फीसदी से बढ़ा कर 20 फीसदी करने में मदद मिलेगी। इस सौदे से आईटी कंपनी के यूरोपीय कारोबार में भी इजाफा होने की संभावना है जिसमें ग्राहक-आधारित मुद्दों के कारण 0.4 फीसदी तक की गिरावट आई है। फॉरेस्टर के वरिष्ठ विश्लेषक सुदिन आप्टे कहते हैं कि एक्सॉन के तकरीबन 2000 लोग इन्फोसिस की झोली में आ जाएंगे।

ये लोग कारोबार परामर्श और व्यवसाय का कायापलट करने की क्षमता से लैस हैं। आप्टे ने बताया कि इन्फोसिस यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी। अमेरिकी मंदी और सब-प्राइम संकट ने बीएफएसआई सेगमेंट को प्रभावित किया है।

सही समय पर सही सौदा

इस सौदे से बढ़ेगा यूरोप में कंपनी का कारोबार
अमेरिकी मंदी से घबराकर, कंपनियां पकड़ रही हैं यूरोप की डगर
इन्फोसिस का 27.3 फीसदी राजस्व आता है यूरोप से
एक्सॉन है इन्फोसिस की तीसरी अधिग्रहित कंपनी

First Published - August 26, 2008 | 11:51 PM IST

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