मेट्रो कैश ऐंड कैरी एक रणनीतिक निवेशक से 30-40 करोड़ डॉलर जुटाने की तैयारी में है। मेट्रो कैश ऐंड कैरी यह कदम तब उठा रही है, जब जर्मनी में उसकी मूल कंपनी ने साफ कह दिया है कि वह भारत में कारोबार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त निवेश करने में असमर्थ है। मूल कंपनी ने कहा है कि वह मेट्रो कैश ऐंड कैरी पर अपना नियंत्रण छोडऩे के लिए तैयार है। उसने जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स को संभावित निवेशक तलाशने के लिए कह भी दिया है। हालांकि किसी के साथ अब तक कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं हो पाई है।
मेट्रो कैश ऐंड कैरी को लगता है कि उसका मूल्यांकन करीब 2 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। मर्चेंट बैंकर इस वर्ष जनवरी से निवेशकों की तलाश कर रहे हैं। मेट्रो कैश ऐंड कैरी में शुरू में दिलचस्पी दिखाने वाले एक निवेशक ने कहा कि कंपनी का मूल्यांकन 70-80 करोड़ डॉलर से अधिक नहीं हो सकता। कंपनी के प्रवक्ता ने इस विषय पर टिप्पणी से इनकार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि मूल कंपनी ने तय कर लिया है कि वह अब मेट्रो कैश ऐंड कैरी को रकम नहीं देगी। दरअसल यूक्रेन और रूस में मूल कंपनी के कई स्टोर बंद या तबाह हो चुके हैं इसलिए शायद कंपनी भारत में और रकम लगाना नहींं चाहती है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि मेट्रो कैश ऐंड कैरी ने जर्मनी में अपनी मूल कंपनी को बताया है कि वह भारत में अपने स्टोरों की संख्या 31 से बढ़ाकर 100 करना चाहती है और देश के कई दूसरे शहरों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। मेट्रो कैश ऐंड कैरी ने यह भी कहा था कि वह और अधिक डार्क स्टोर खोलने के साथ तकनीक में निवेश करना चाहती है तथा ऑनलाइन व्यवसाय का विस्तार करना चाहती है, जिसकी उसके कुल राजस्व में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है। जियो मार्ट, उड़ान, एमेजॉन आदि कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर से निपटने के लिए भी कंपनी को रकम की जरूरत होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि कंपनी को उन बड़ी कंपनियों से भी प्रतिस्पद्र्धा करनी होगी जो काफी कम दाम पर अपने उत्पाद बेच रही हैं।
सूत्रों ने कहा कि मेट्रो कैश ऐंड कैरी को अगले तीन से चार वर्षों के दौरान 30-40 करोड़ डॉलर रकम की जरूरत होगी जिसका सीधा मतलब है कि हरेक वर्ष करीब 10 करोड़ डॉलर की जरूरत होगी। इस मामले की पूरी जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि कंपनी में देश की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों की दिलचस्पी होगी। रिलायंस, थाईलैंड के सी पी समूह जैसी कंपनियों के नामों की चर्चा भी होनी शुरू हो गई है। सी पी समूह ने भारत में कैश ऐंड कैरी कारोबार शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार मेट्रो कैश ऐंड कैरी को लगता है कि उनका राजस्व 1 अरब डॉलर पार पहुंचने वाला है इसलिए संभावित निवेशक उसकी हैसियत अधिक आंक सकते हैं। कंपनी की एबिटा पिछले चार वर्षों से सकारात्मक रही है और सितंबर में समाप्त होने वाले इस वित्त वर्ष में एबिटा करीब 35 प्रतिशत रहने की उम्मीद है जबकि दूसरी ई-कॉमर्स कंपनियां इस मोर्चे पर नुकसान में हैं।