अभी तक निजी कंपनियों के पास मौजूद ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी बाजार में बेचे जाने की ही खबरें आती थीं मगर अब भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) भी यात्रियों की जानकारी दूसरी कंपनियों को देकर कमाई करने जा रही है। आईआरसीटीसी यात्रियों का डेटा निजी और सरकारी कंपनियों के साथ साझा करेगी मगर इससे रेल यात्रियों का डेटा प्रभावित हो सकता है। इसका खाका तैयार करने और अनुमानित आय का पता लगाने के लिए कंपनी ने सलाहकारों की मदद मांगी है।
भारतीय रेल की टिकट बुक करने वाली इकाई आईआरसीटीसी इस पहल से 1,000 करोड़ रुपये कमाना चाहती है। इसमें मदद के लिए सलाहकारों की नियुक्ति के मकसद से कंपनी ने निविदा जारी की है। आईआरसीटीसी मानती है कि होटलों से लेकर ऊर्जा, बुनियादी ढांचा से लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र तक की कंपनियां यह डेटा ले सकती हैं।
आईआरसीटीसी द्वारा जारी निविदा बिज़नेस स्टैंडर्ड ने देखी है। इसमें कहा गया है, ‘भारतीय रेलवे ग्राहक/वेंडर ऐप्लिकेशन तथा अपने आंतरिक ऐप्लिकेशन पर मौजूद जानकारी से कमाई करना चाहती है। इसके तहत कंपनी राजस्व अर्जित करने तथा सेवाओं में आगे और सुधार लाने के लिए विभिन्न सरकारी एवं निजी कंपनियों जैसे टूर एवं ट्रैवल्स, होटल, वित्तीय, बुनियादी ढांचा कंपनियों, बीमा क्षेत्र, स्वास्थ्य क्षेत्र, विनिर्माण क्षेत्र, शिपिंग, विमानन, बंदरगाह विकासकर्ताओं, कंटेनर परिचालकों, खनन, ऊर्जा कंपनियों आदि के साथ काम करेगी।’
आईआरसीटीसी से जुड़े सूत्रों ने कहा कि मामला अभी शुरुआती चरण में है लेकिन रेलवे बोर्ड मुद्रीकरण की यह कवायद आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट तौर पर जोर दे रहा है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब रेल विभाग अपनी भौतिक संपत्तियों का मुद्रीकरण करने के लिए जूझ रहा है। इसलिए विभाग इस वित्त वर्ष का मुद्रीकरण का भारीभरकम लक्ष्य पूरा करने के लिए अपनी डिजिटल संपत्तियों और डेटा बैंक के जरिये अतिरिक्त आमदनी की कोशिश कर सकता है।
कट्स इंटरनैशनल में निदेशक (शोध) अमोल कुलकर्णी ने कहा कि यात्रियों की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से उपभोक्ता अधिकारों का हनन हो सकता है।
कुलकर्णी ने कहा, ‘डेटा इकट्ठा किया जाता है, पहचान हटाकर उसे गोपनीय बनाया जाता है और संरक्षण भी किया जाता है। हो सकता है कि आईसीआरटीसी पहचान हटाए बगैर ही यह जानकारी विभिन्न सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करे। इससे निजता का हनन होगा और डेटा के दुरुपयोग का जोखिम बहुत बढ़ जाएगा। हमारे यहां अभी डेटा सुरक्षा विधेयक नहीं बन पाया है और गैर-व्यक्तिगत डेटा को दुरुपयोग से बचाने के लिए पर्याप्त साधन भी हमारे पास नहीं हैं। इस लिहाज से ऐसा करना दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है।’
आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि निविदा में कहा गया है कि इस मुद्रीकरण अभियान के लिए सलाहकार को प्रवर्तन की समस्या हल करनी होगी क्योंकि मामला गोपनीयता से जुड़ा है। आईआरसीटीसी के पास जारी होने वाले प्रत्येक रेलवे टिकट का व्यापक डेटा बैंक है क्योंकि यह अकेला रेलवे टिकटिंग प्लेटफॉर्म है।