विमानन कंपनी को संयुक्त उपक्रम के तौर पर चलाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, खास तौर पर जब साझेदारों के पूंजी निवेश करने की बात आती है। यह कहना है कि एयर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक कैम्पबेल विल्सन का। निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी विस्तारा टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड (एसआईए) का 51:49 फीसदी साझेदारी वाला संयुक्त उपक्रम है और यह 2015 में अपनी शुरुआत से ही घाटे में चल रही है।
सिंगापुर एयरलाइंस ने पिछले हफ्ते सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि वह विस्तारा और एयर इंडिया के विलय के लिए टाटा संस के साथ बातचीत कर रही है। दोनों विमानन कंपनी के एकीकरण योजना की यह पहली स्वीकारोक्ति है।
विल्सन से जब यह पूछा गया कि टाटा संस के अंतर्गत एयर इंडिया किस तरह से अलग होगी क्योंकि विस्तारा अभी तक सफल नहीं हो पाई है और न ही देश के विमानन क्षेत्र में बड़ी भागीदार बन पाई है। सिंगापुर एयरलाइंस के दिग्गज रहे विल्सन ने अगस्त में एयर इंडिया की कमान संभाली है।
विल्सनने कहा, ‘विमानन कंपनी को व्यापक बनाना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन एयर इंडिया के साथ ऐसी समस्या नहीं है। इसलिए विमान या स्लॉट या फिर बाजार की बात करें तो एयर इंडिया के मामले में यह सब काम एकदम शुरुआत से करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया टाटा संस की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनी है। विल्सन ने कहा, ‘मैं किसी संयुक्त उद्यम भागीदार पर आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन पूंजी योगदान के मामले में साझेदारी हमेशा थोड़ी अधिक चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि आमतौर पर ऐसा देखा गया है।’
उन्होंने कहा, ‘100 फीसदी स्वामित्व वाली इकाई को लेकर अकेले कोई निर्णय लिया जा सकता है और एयर इंडिया के मामले में ऐसा संभव है। लेकिन संयुक्त उपक्रम के मामले में गकोई एक साझेदार अपने विचार नहीं थोप सकता है और इसमें दोनों के विचार को महत्त्व देना होता है।’
टाटा संस के पास एयर एशिया इंडिया में 83.67 फीसदी हिस्सेदारी है और शेष हिस्सेदारी मलेशिया की कंपनी एयरएशिया समूह के पास है। विस्तारा की तरह एयर एशिया इंडिया भी 2014 में अपनी शुरुआत से घाटे में चल रही है। विल्सन ने कहा कि एयर इंडिया के 43 चौड़ी बॉडी वाले विमानों में सीटों आदि को नए सिरे से तैयार किया जाएगा और यह काम अगले साल की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया अगले पांच साल में अंतरराष्ट्रीय विमानन बाजार में अपनी बाजार हिस्सेदारी मौजूदा 12 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करेगी। इसी तरह अगले पांच साल में घरेलू बाजार में इसकी बाजार हिस्सेदारी मौजूदा 10 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी की जाएगी।
विल्सन ने कहा कि एयर इंडिया के बेड़े में 30 नए विमानों को शामिल किया जा रहा है जिसके लिए हाल ही में पट्टा करार किया गया है और तेजी से अपने परिचालन का विस्तार करने के लिए कंपनी और भी विमानों को पट्टे पर ले सकती है एयर इंडिया के बेड़े में फिलहाल संकरी बॉडी वाले 70 विमान और चौड़ी बॉडी वाले 43 विमान हैं। हाल में पट्टे पर लिए गए 30 विमान इसके बेड़े में दिसंबर 2023 तक शामिल होंगे।
एयर इंडिया विमान विनिर्माताओं के संपर्क में है ताकि अगले पांच साल में बेड़े का आकार तीन गुना बढ़ाने के लिए विमानों का ऑर्डर देने में उसे मदद मिलेगी। विल्सन ने कहा कि एयर इंडिया ‘पसंदीदा नियोक्ता’ बन गई है और हाल में विभिन्न पदों पर भर्तियों के दौरान इसे पेशेवरों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के बेड़े में व्यापक विस्तार होगा, इसलिए भर्तियां भी उसके अनुरूप की जाएंगी।