भारतीय उद्योग जगत विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो जैसी आईटी सेवा निर्यातकों पर पहले से ज्यादा निर्भर हो गई है। एक दशक पहले कुल अर्जित विदेशी मुद्रा में सूचीबद्ध आईटी फर्मों की हिस्सेदारी 22 फीसदी थी, जो अब बढ़कर करीब 43 फीसदी हो गई है। सूचीबद्ध आईटी कंपनियों ने निर्यात से वित्त वर्ष 2022 में करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये कमाए, जो साल भर पहले के 3.65 लाख करोड़ रुपये से 16.3 फीसदी अधिक हैं। उनकी तुलना में बीएसई 500 कंपनियों की विदेशी मुद्रा में आय पिछले वित्त वर्ष में 11.9 फीसदी घटकर 5.6 लाख करोड़ रुपये रही।
पिछले पांच साल में आईटी कंपनियों की विदेशी मुद्रा में आय सालाना 11.3 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है, जो वित्त वर्ष 2017 में 2.48 लाख करोड़ रुपये थी। आईटी क्षेत्र से इतर फर्मों की विदेशी मुद्रा में आय इस दौरान महज महज 3.5 फीसदी सालाना बढ़ी। बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल गैर-आईटी कंपनियों की विदेशी मुद्रा में कुल आय वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2021 में 5.6 लाख करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2014 और वित्त वर्ष 2015 के रिकॉर्ड 6.04 लाख करोड़ रुपये से कम है।
विश्लेषकों का कहना है कि देश के चालू खाते के घाटे को काबू में रखने में आईटी क्षेत्र का अहम योगदान है। आईटी निर्यात सुस्त पड़ने से देश का बाहरी घाटा बढ़ेगा, जिससे मुद्रा में गिरावट आ सकती है।
हमारा विश्लेषण बीएसई500 सूचकांक में शामिल 395 कंपनियों के ऑडिट किए हुए सालाना वित्तीय नतीजों पर आधारित है, जिसमें बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय और बीमा कंपनियां शामिल नहीं हैं। इनमें से 191 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 के लिए विदेशी मुद्रा लेनदेन की जानकारी दी है और बाकी 204 कंपनियों के आंकड़े वित्त वर्ष 2021 के हैं। मगर वित्त वर्ष 2022 में जिन कंपनियों ने विदेशी मुद्रा में आय की जानकारी दी है, उनकी पूरे नमूने की विदेशी मुद्रा आय में करीब 65 फीसदी हिस्सेदारी है।
कुल मिलाकर हमारे नमूने में शामिल बीएसई 500 कंपनियों की विदेशी मुद्रा में कुल आय वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2021 में 9.83 लाख करोड़ रुपये रही, जो इससे एक साल पहले के 10 लाख करोड़ रुपये से मामूली कम है। इसकी तुलना में विदेशी मुद्रा में उनका खर्च पिछले वित्त वर्ष के 13.96 लाख करोड़ रुपये से 12.4 फीसदी घटकर 12.23 लाख करोड़ रुपये रहा।
उद्योग जगत की विदेशी मुद्रा आय में आईटी क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि अन्य निर्यात उन्मुख क्षेत्रों की तुलना में विदेशी मुद्रा खर्च के मामले में भी आईटी क्षेत्र पीछे है। उदाहरण के लिए आईटी कंपनियों का विदेशी मुद्रा में खर्च 1.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो उनकी कुल निर्यात आय का करीब आधा है। दूसरी ओर तेल एवं गैस तथा खनन कंपनियां विदेशी मुद्रा में कमाई से ज्यादा खर्च करती हैं। यही वजह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का विदेशी मुद्रा घाटा पिछले वित्त वर्ष में 3.96 लाख करोड़ रुपये रहा था। धातु एवं खनन कंपनियों का विदेशी मुद्रा घाटा 20,000 करोड़ रुपये रहा था।
पिछले वित्त वर्ष में 40,300 करोड़ रुपये के शुद्ध निर्यात के साथ फार्मा कंपनियां दूसरे स्थान पर रही थीं। उनके बाद वाहन और सहायक उद्योग (20,000 करोड़ रुपये) तथा कपड़ा एवं परिधान कंपनियों (5,800 करोड़ रुपये) का स्थान आता है।