जेट लाइट के एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान करने वाली जेट एयरवेज ने इस दिशा में पहला कदम बढ़ा भी दिया है।
कंपनी ने जेट लाइट के 750 कर्मचारियों को नौकरी से हटने की पेशकश का संदेशा भी दे दिया गया है। कंपनी ने एक साल या उससे कम समय से जेट लाइट में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने स्वेच्छा से अलग होने (वीएसएस) की पेशकश की है।
कंपनी देगी मोटा मुआवजा
नरेश गोयल द्वारा प्रवर्तित जेट ने इसके तहत तकरीबन 5 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने की योजना बनाई है। जेटलाइट के अधिकारियों का कहना है कि जिन कर्मचारियों को वीएसएस की पेशकश की गई है, उनमें 400 एयरपोर्ट सर्विस, 160 इंजीनियरिंग सर्विस और 100 सेल्स ऐंड मार्केटिंग विभागों से हैं। बाकी परचेज स्टोर्स और प्रशासन विभागों से हैं।
एचआर भी लपेटे में
हालांकि जेट लाइट में छंटनी का दौर यहीं पर नहीं थमेगा। कंपनी का ढांचा बदलने से पहले मानव संसाधन जैसे विभागों पर भी कैंची चलाई जाएगी। इतना ही नहीं मोटी तनख्वाह पाने वाले तकरीबन 800 कर्मचारियों पर भी छंटनी की गाज गिर सकती है।
जेट लाइट के मुख्य परिचालन अधिकारी राजीव गुप्ता ने बताया कि वीएसएस केवल 750 कर्मचारियों को ही पेश किया गया है। उन्हें जो मुआवजा दिया जाएगा, उसके लिए देखा जाएगा कि वह कितने समय से कंपनी के साथ हैं।
कंपनी के महाप्रबंधक (एच आर) एस चालके ने बताया कि किसी भी कर्मचारी ने कंपनी के साथ जितने महीने काम किया है, उतने महीने का वेतन उसे बतौर मुआवजा दिया जाएगा। जिनके सामने वीएसएस की पेशकश रखी गई है, उनमें कम से कम 450 कर्मचारी एक साल से कंपनी में काम कर रहे हैं।
कम हैं तो बेहतर
गोयल ने 2007 में एयर सहारा को 1,450 करोड़ रुपये में खरीदा था और उसके बाद उसका नाम बदलकर जेट लाइट रख दिया था। जेट लाइट में अभी तकरीबन 2300 कर्मचारी काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की इतनी बड़ी तादाद पर जेट एयरवेज पहले से ही सवाल खड़े कर रही थी।
जेट लाइट के मुख्य कार्यकारी वोल्फगैंग प्रॉक शावेर ने कहा था, ‘जेटलाइट का परिचालन जारी रखने के लिए इसका जेट एयरवेज के साथ मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। दोनों कंपनियों को साथ मिलकर काम करना है।’