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के जी बेसिन में है ऊर्जा संकट दूर करने वाला जिन्न

Last Updated- December 07, 2022 | 8:02 PM IST

के जी बेसिन से बड़ी उम्मीदें हैं।


तीन कंपनियां लगभग 1,26,000 करोड़ रुपये के सामूहिक निवेश के साथ सभी की नजरों में हैं, क्योंकि इनके प्रयास से भारत की गैस की कमी धुआं बन कर उड़ जाएगी, ऊर्जा में चली आ रही कमी आधी हो जाएगी और उर्वरक उद्योग का भविष्य ही बदल जाएगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (जीएसपीसी) मिलकर इतने बड़े निवेश को भारत के उत्तरी समुद्र कहलाने वाली कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस उत्पादन के लिए लगाएंगी।

विभिन्न तेल कंपनियां और इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार आंध्र प्रदेश के तट से यह गैस निकलना शुरू हो जाए तो एशिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाले देश भारत का तेल आयात बिल कम से कम 84 हजार करोड़ रुपये से कम हो जाएगा। इस वित्त वर्ष में तेल आयात बिल लगभग 3,36,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।

सस्ती होगी गैस

चलिए इसकी तुलना प्रस्तावित ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन से करते हैं। उम्मीद है कि इस बेसिन में लगभग 12 करोड़ घन मीटर गैस का प्रति दिन उत्पादन किया जाएगा जो ईरान से देश को मिलने वाली गैस से लगभग चार गुना अधिक है। ईरान से मिलने वाली गैस के मुकाबले घरेलू गैस लगभग 30 प्रतिशत सस्ती होगी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो इस साल के अंत में इस क्षेत्र से सबसे पहले गैस का उत्पादन करेगी, के एक अधिकारी का कहना है, ‘एक बार में ही के-जी गैस देश की ऊर्जा की कमी को आधा कर देगी और यूरिया आयात पर निर्भरता को 50 प्रतिशत से अधिक कम कर देगी।’

रिलायंस, जीएसपीसी और ओएनजीसी ने के-जी बेसिन में तीन विभिन्न ब्लॉकों में कुछ गैस, तेल की खोज की है। रिलायंस की योजना गैस उत्पादन और देशभर में उसे पहुंचाने के लिए 50,400 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। 

एक अधिकारी का कहना है कि ओएनजीसी ने भी इस क्षेत्र में 12,600 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की है और अंतिम निवेश 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। कंपनी के अधिकारी ने नाम छुपाए रखने पर कहा , ‘इससे देश की गैस उपलब्धता को उसके मौजूदा स्तरों से बढ़ाने में मदद मिलेगी।’

जीएसपीसी की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी यह दावा कर रहे हैं कि इस दशक के पहले भाग में कंपनी का गैस भंडार 200 खरब घन फुट का हो जाएगा। यह हाल ही में ब्राजिल और मलेशिया की बेसिन में मिले सबसे बड़े भंडारों से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।

ग्राहकों को है उम्मीद

ऊर्जा और उर्वरक संयंत्र, जो देश में फिलहाल उपलब्ध गैस का लगभग 70 प्रतिशत इस्तेमाल कर लेते हैं, उन्हें उम्मीद है कि इस गैस की मदद से उन्हें अपने संयंत्रों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। भारत की उर्वरक निर्माता कंपनियों के संघ के एक अधिकारी का कहना है, ‘के-जी बेसिन में इस एक घटना से बीमार पड़े उर्वरक क्षेत्र का भाग्य बदल जाएगा।’

लगभग एक साल पहले देशभर के युरिया उत्पादन संयंत्रों ने नेपथा से हटकर गैस का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। चंबल फर्टिलाइजर्स के एक अधिकारी का कहना, ‘हम लोग गैस की बजाय नेपथा या आयाातित गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं जो हमारी लागत को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देती है।’

पिछले दस साल में उर्वरक उद्योग में कोई नया निवेश नहीं देखा गया है। अधिक गैस के साथ उम्मीद है कि कंपनियां अपने बेकार संयंत्रों को शुरू कर देंगी और अगले दो वर्षों में अपनी मौजूदा क्षमता 20 करोड़ टन को लगभग 2 करोड़ टन से बढ़ा लेंगी।

श्रीराम फर्टिलाइजर ऐंड केमिकल्स के चेयरमैन एवं वरिष्ठ प्रबंध निदेशक अजय श्रीराम का कहना है, ‘हमने एक साल पहले अपने संयंत्र को गैस आधारित संयंत्र में तब्दील कर दिया था, लेकिन अभी तक हमारा किसी कंपनी के साथ गैस के लिए ठोस करार नहीं हो पाया है। चूंकि गैस नेपथा से सस्ती पड़ती है, इसलिए हम गैस की आपूर्ति के लिए कई सप्लायरों से बात कर रहे हैं। हालांकि ऐसा होने में कुछ समय लगेगा।’

ऊर्जा में बढ़त

2013 के बाद जब के-जी बेसिन से गैस मिलनी शुरू हो जाएगी तब इससे कम से कम 10 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता का इजाफा होगा, जो देश में मौजूदा ऊर्जा की कमी के आधे से अधिक है। लगभग 3 हजार मेगावाट गैस आधारित ऊर्जा संयंत्र फिलहाल बेकार पड़े हैं, जबकि देश की योजना 2012 तक 4,200 मेगावाट के गैस से चलने वाली अन्य ऊर्जा क्षमताओं को शामिल करने की है।

सरकार की ओर से 4.20 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल इकाई कीमत पर मंजूरी मिल चुकी इस गैस से ऊर्जा की लागत में लगभग 60 प्रतिशत की कमी हो जाएगी। के-जी गैस की कीमत, जिसे ये संयंत्र खरीदेंगे उम्मीद है कि परिवहन शुल्क और करों को शामिल कर लेने के बाद 7 डॉलर प्रतिशत 10 लाख ब्रिटिश थर्मल इकाई होगी।

इसके उलट वैकल्पिक नेपथा और आयातित गैस की लागत 25 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल इकाई से ज्यादा है। महाराष्ट्र पावर जेनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक अजय मेहता का कहना है कि कंपनी का अर्बन ऊर्जा संयंत्र केजी बेसिन क्षेत्र के तट से 4.52 डॉलर प्रतिशत 10 लाख ब्रिटिश थर्मल इकाई की दर से 10 लाख घन मीटर गैस लेता है। इससे अर्बन संयंत्र की क्षमता 175 मेगावाट बढ़ जाएगी।

ईंधन का परिवहन

रिलायंस की योजना आंध्र प्रदेश के तट से देशभर के ग्राहकों तक गैस पहुंचाने के लिए लगभग 50,400 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने की है। कंपनी की काकीनाड़ा से गुजरात तक 16,800 करोड़ रुपये की लागत से बिछाई जाने वाली पाइपलाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है।

रिलायंस के एक अधिकारी का कहना है, ‘ये पाइपलाइनें इस मार्ग पर न सिर्फ उद्योगों को गैस आपूर्ति करेगी, बल्कि चेन्नई, बेंगलुरु, मेंगलुरु और अन्य शहरों के खुदरा ग्राहकों को भी गैस मुहैया कराएगी।’ रिलायंस का डी6 ब्लॉक क्षेत्र अभी भी अनिल अंबानी समूह कंपनी के साथ विवादों से घिरा हुआ है, जिसके बारे में अनिल अंबानी समूह का कहना है कि उनका भी अधिकार इस गैस के हिस्से पर है।

भारतीय गैस बाजार (10 लाख घन मीटर प्रति दिन में)
मांग : 190
उपलब्धता : 90
उर्वरक का इस्तेमाल : 29
ऊर्जा का इस्तेमाल 27

उत्पादन का अनुमान (10 लाख घन मीटर प्रति दिन में)
रिलायंस : 80
ओएनजीसी : 25-31
जीएसपीसी : 5

असर

तेल आयात का बिल लगभग 84 हजार करोड़ रुपये से कम हो जाएगा
ऊर्जा की कमी आधी हो जाएगी
उर्वरक सब्सिडी बिल का पांचवा हिस्सा कम हो जाएगा, आयात पर निर्भरता होगी कम
अगले चार वर्षों में 1,26,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना

First Published - September 5, 2008 | 11:53 PM IST

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