टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने सिंगुर में अपना कारखाना बंद करने की बात कहकर आज सनसनी फैला दी।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हालात बिगड़ने पर टाटा मोटर्स नैनो बनाने के लिए लगाया संयंत्र बंद भी कर सकती है। पेश है हमारी संवाददाता इशिता आयान दत्त की रतन टाटा के साथ बेबाक बातचीत।
ममता बनर्जी 400 एकड़ जमीन लौटाए जाने की मांग कर रही हैं। टाटा समूह की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
हम उस समय पश्चिम बंगाल आए थे, जब ज्यादातर लोग हमें पागल मान रहे थे। पश्चिम बंगाल में विकास न के बराबर हुआ था, यहां निवेश भी बहुत कम किया गया था। टाटा मोटर्स ने तब फैसला किया कि वह अपनी सबसे अहम और अनूठे कारखानों में से एक पश्चिम बंगाल में लगाएगी। हम चाहते थे कि पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण की नई बयार बहने लगे।
हमें जो जमीन दी गई, हमने उसे पट्टे पर ले लिया और उसका अधिग्रहण भी कर लिया गया। हम चाहते थे कि हमारी छोटी कार के संयंत्र के पास ही उन कंपनियों के कारखाने भी हों, जो इसके लिए पुर्जे दे रही हैं। हम ऐसी कार बनाने की कोशिश कर रहे हैं,जो दुनिया में कभी नहीं बनाई गई और न ही उतनी कीमत की कार कभी आई है। लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ को देखकर हमें अपने कर्मचारियों की हिफाजत की फिक्र हो गई। हम ऐसी जगह नहीं आना चाहते, जहां हमें पसंद न किया जाए। हम यहां किसी का शोषण करने नहीं आए हैं, हमें तो पश्चिम बंगााल की जनता की चिंता है।
लेकिन हम एक बात साफ करन देना चाहते हैं। अगर किसी को भी लगता है कि सिंगुर में हम 1,500 करोड़ रुपये का भारी भरकम निवेश कर चुके हैं, इसलिए यहां बने रहना हमारी मजबूरी है, तो वह गलत है। हम अपने लोगों की हिफाजत के लिए कितनी भी बड़ी रकम कुर्बान कर सकते हैं। हम अपने कर्मचारियों को पिटने के लिए बंगाल में नहीं बुला सकते। यही हमारी चिंता है।
लेकिन आप परेशान किस बात पर हैं? हिंसा की वजह से या कोई और वजह है?
मुझे केवल एक ही बात से परेशानी है और वह है, तनाव, हिंसा और तोड़फोड़। कुल मिलाकर अच्छा माहौल तो नहीं है। मैं उन लोगों की तारीफ करूंगा, जो इतने तनाव के बावजूद परियोजना स्थल पर काम कर रहे हैं। हमारे कारखाने की दीवारें तोड़ दी गई हैं, लोग अंदर आ रहे हैं और माल चुराया जा रहा है। हम पुलिस सुरक्षा में कोई संयंत्र नहीं खोल और चला सकते। अगर यह बयान आता है कि किसी कार को संयंत्र से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा, तो जाहिर तौर पर हमें यहां रुकने की कोई वजह नहीं मिलेगी।
क्या आपको बंगाल आने पर अफसोस है?
नहीं, मैं पूरी तरह आशावादी किस्म का शख्स हूं। मैं पहले एक भारतीय हूं और जानता हूं कि पश्चिम बंगाल भारत का ही हिस्सा है। बस, अब मुझे लगता है कि टाटा को यहां पसंद नहीं किया जा रहा। हकीकत तो यह है कि जो जमीन हमें दी गई, हमने उसे कानूनी तौर पर ही अधिग्रहीत किया है।
कुछ लोग कहते हैं कि सिंगुर सौदा पारदर्शी नहीं था। आपको नहीं लगता कि इस सौदे को सार्वजनिक नहीं करने के राज्य सरकार के फैसले से ही लोग भड़के हैं?
देखिए, मुझे नहीं लगता कि पारदर्शिता की कमी है और मैं सरकार के किसी भी काम पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरा काम कार बनाना है और सरकार का काम सरकार के ही जिम्मे है।
ऐसी हालत में आपको अक्टूबर में सिंगुर से नैनो का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है?
हम अक्टूबर के आसपास नैनो का उत्पादन करने की हालत में हैं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि कई लोग ऐसा नहीं होने देना चाहते। इसलिए इसे रोकना लोगों के लिए बेहद आसान है। लेकिन हम चाहते हैं कि नैनो सड़क पर आए और यह हो सकता है।
आपने अभी कहा कि हिंसा जारी रहने पर आप यहां से चले जाएंगे। क्या आपने इसके लिए कोई मियाद तय कर ली है या सोच लिया है कि एक तय समय तक हिंसा जारी रहने पर आप यहां से चले जाएंगे?
नहीं, मेरी बात को समझिए। मेरा यहां से जाने का इरादा या योजना नहीं है। मैंने यहां बड़ा निवेश किया है और मुझे लगता है कि बंगाल के लिए भी यह बेहद कीमती है। यहां से जाने के लिए कोई मियाद नहीं है, लेकिन हमें अपने लोगों की फिक्र है और मैं कह रहा हूं कि बंगाल के लोगों को हम पर शक है क्योंकि यही बात पूरी तरह सच है।
क्या आपके पास दूसरी योजना भी है?
नहीं। इस वक्त तो कोई दूसरी योजना नहीं है।