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लॉरियल को मुनाफाखोरी के 186 करोड़ रुपये देने का आदेश

Last Updated- December 11, 2022 | 1:53 PM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सौंदर्य प्रसाधन निर्माता लॉरियल को 186 करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी की मूल राशि उपभोक्ता कल्याण कोष में छह मासिक किश्तों में जमा करने का निर्देश दिया है। हालांकि न्यायालय ने अगले आदेश तक मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण द्वारा दंडात्मक कार्यवाही और जांच पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा के पीठ ने राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (एनएए) के जून के आदेश को चुनौती देने वाली लॉरियल की याचिका पर यह निर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया कि कंपनी ने अपने ग्राहकों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी के लाभों से वंचित रखा है। 
लॉरियल ने केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 171 की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसमें यह प्रावधान है कि वस्तुओं या सेवाओं की किसी भी आपूर्ति पर कर की दर में कमी या इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उसी अनुपातिक में दामों में कटौती के माध्यम से प्राप्तकर्ता को दिया जाएगा। इसके साथ ही यह सौंदर्य प्रसाधन ब्रांड जीएसटी प्रणाली के तहत एनएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में शामिल हो गया है।
इन याचिकाओं (जिनकी संख्या करीब 80 है) में हिंदुस्तान यूनिलीवर, पतंजलि, जुबिलेंट फूडवर्क्स, रेकिट बेंकिजर, जॉनसन ऐंड जॉनसन, फिलिप्स और सबवे जैसी प्रमुख कंपनियों की याचिकाएं भी शामिल हैं।

First Published - October 10, 2022 | 9:36 PM IST

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