उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के लिए एलऐंडटी, अदाणी, जीएमआर समेत अग्रणी ऊर्जा व बुनियादी ढांचा कंपनियों ने बोली लगाई है। सरकारी इकाई ईईसीएल व एनआईआईएफ के संयुक्त उद्यम इंटेलिस्मार्ट ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है। 23,000 करोड़ रुपये की इस निविदा के तहत राज्य में 2.8 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं।
ये स्मार्ट मीटर उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पीयूवीएनएल, पीवीवीएनएल, डीवीवीएनएल और एमवीवीएनएल के इलाकों में लगाए जाने हैं। यह पूरे राज्य को कवर करता है, जिसमें केस्को वितरण कंपनी का इलाका शामिल नहीं है, जो कानपुर सिटी है।
उत्तर प्रदेश में अब तक 11 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। हाल में केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने भी 1 करोड़ स्मार्ट मीटर की खरीद के लिए देश की सबसे बड़ी निविदा निकाली थी। करीब एक दर्जन मीटर विनिर्माता और बिजली क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां बोली पूर्व बैठक में शामिल हुई हैं। ये कंपनियां इसके लिए बोली लगा सकती हैं। इनमें अदाणी, एलऐंडटी, रॉबर्ट बॉश, ईडीएफ, टाटा पावर, इंडिया पावर, और अशोका बिल्डकॉन जैसी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां शामिल हैं।
लैंडिस+गियर, श्नाइडर, सिक्योर मीटर्स, अन्विल केबल्स, एवन जैसी प्रमुख मीटर निर्माता कंपनियों ने भी बोली प्रक्रिया पूर्व चर्चा में हिस्सा लिया और उनके द्वारा बोलियां सौंपे जाने की संभावना है। स्मार्ट मीटर की पेशकश केंद्र सरकार की हाल में शुरू की गई विद्युत वितरण सुधार योजना का हिस्सा है। 3 लाख करोड़ रुपये की रीवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) का मकसद सरकार के स्वामित्व वाले डिस्कॉम/विद्युत विभागों की परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिति सुधारना है।
योजना का व्यय केंद्र सरकार की 97,631 करोड़ रुपये की अनुमानित सकल बजटीय सहायता के साथ 3,03758 करोड़ है। इसमें से, 10,000 करोड़ रुपये पूरे देश में स्मार्ट मीटर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित किए गए। सरकार के अनुमान में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने का संकेत दिया गया है।