भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने देश में अपनी सभी कारों में के-सीरीज पेट्रोल इंजनों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
कंपनी ने अगले 3-5 वर्षों में अपनी कारों को इन नए इंजनों से लैस करने की योजना बनाई है। 2007-08 के लिए कंपनी की सालाना रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। ये नए इंजन शुरू में इसकी ग्लोबल कार ए स्टार के लिए बनाए जाएंगे। ये इंजन हरियाणा के मनेसर में तैयार किए जाएंगे।
ए स्टार इस साल को अंतिम तिमाही में लॉन्च किया जाएगा। यह कार भारत में बनाई और यूरोप में बेची जाएगी। इन इंजनों के इस्तेमाल से ईंधन की खपत में कमी लाई जा सकेगी। हालांकि कंपनी ने फिलहाल इस इंजन के माइलेज का खुलासा नहीं किया है।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘के-सीरीज इंजन बेहद अत्याधुनिक हैं। इन्हें अगले 3-5 वर्षों में कारों के सभी मौजूदा मॉडलों में फिट किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि ये इंजन 109 ग्राम प्रति किलोमीटर कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं और बाद में इसमें और कटौती की जा सकेगी।
लेकिन एक अहम बात यह भी है कि इन इंजनों का पूरा फायदा तभी उठाया जा सकता है जब देश में ईंधन की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। सुजुकी इस मामले में अपनी प्रतिस्पर्धी हुंडई से पिछड़ सकती है। हुंडई इंडिया भारत में अपने मॉडलों में पहले ही यूरो 4 मानक की शर्तें पूरी करने वाले इंजनों का इस्तेमाल कर चुकी है।
हुंडई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमारे पास 1.2 लीटर आई10 के लिए कप्पा इंजन, सेंट्रो के लिए एप्सीलोन और 5 लीटर वाली बड़ी कारों के लिए पेट्रोल इंजनों की रेंज मौजूद हैं। हम यूरोप के लिए पहले से ही अपने इंजनों का निर्यात कर रहे हैं। हमारे यूरो 4 इंजनों का भारतीय कारों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।’
मारुति सुजुकी अपने मॉडलों में पांच तरह के इंजन इस्तेमाल करती है। इनमें मारुति 800, ओमनी, वैगन आर और जेन एस्टिलो में एफ-सीरीज इंजन, स्विफ्ट, डिजायर, इस्टीम और वर्सा में जी-सीरीज, एसएक्स4 में एम-सीरीज और जल्द लॉन्च होने वाली ए स्टार में के-सीरीज इंजन शामिल हैं।