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मेट्रोपोलिस की नजर 100 फीसदी आबादी पर रहेगी

Last Updated- December 11, 2022 | 6:16 PM IST

कोविड-19 संबंधी कारोबार में सुस्ती के साथ ही डायग्नोस्टिक क्षेत्र की कंपनियों के मुनाफे को तगड़ा झटका लगा है। हालांकि इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में अपने श्रमबल और बुनियादी ढांचे की लागत का वहन किया। मेट्रोपोलिस की प्रवर्तक एवं प्रबंध निदेशक अमीरा शाह ने सोहिनी दास से बातचीत में बदलते बाजार परिदृश्य और कंपनी की आगे की रणनीति के बारे में खुलकर चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:

डायग्नोस्टिक उद्योग का परिदृश्य बदल रहा है। मेट्रोपोलिस के लिए आप आगे क्या करने जा रही हैं?
यदि हम पिछले 20 वर्षों पर गौर करेंगे तो हम उसे दो भागों में बांट सकते हैं क्योंकि इस दौरान हमने वृद्धि के लिए दो अलग-अलग नीतियों पर अमल किया। साल 2001 से 2015 के बीच हम काफी हद तक बिजनेस टु बिजनेस पर केंद्रित कंपनी थे और इसकी शुरुआत एक शहर में एक प्रयोगशाला के साथ हुई थी। हमारे विकास का पहला चरण मेट्रोपोलिस को एक ब्रांड के तौर पर स्थापित करना, शहरों में विस्तार, हमारे ब्रांड को स्थापित करने के लिए डॉक्टरों से संपर्क आदि का था। उस दौरान यह मुख्य तौर पर प्रवर्तकों द्वारा संचालित कंपनी थी और हमारे पास कोई दमदार प्रबंधन टीम नहीं थी। साल 2015 में हमने मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर को पेशेवर बनाने और बेहतर टीम लाने की पहल की। उसी सफर के तहत मेट्रोपोलिस 2.0 की शुरुआत हुई। हम अपने बिजनेस टु कंज्यूमर फ्रैंचाइजी के तौर पर कारोबार स्थापित करना चाहते थे। साल 2016 में हमारे केंद्रों की संख्या 300 थी जो बढ़कर अब 3,100 से अधिक हो चुकी है। साल 2021 से 2015 की अवधि भौगोलिक विस्तार का दौर था। पिछले तीन साल के दौरान बाजार में कुछ ढांचागत बदलाव हुए हैं और उसने उपभोक्ता वर्ताव को काफी हद तक बदल दिया है। लोग डिजिटल माध्यम को अपना रहे हैं और सरलता पर जोर दे रहे हैं। वे आजकल डायग्नोस्टिक में भी फूड ऑर्डरिंग अथवा घर पर स्पा जैसी सेवाएं हासिल करना चाहते हैं।

आगे के लिए आपकी रणनीति क्या है?
हम अगले कुछ वर्षों के दौरान मेट्रोपोलिस 3.0 रणनीति पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हमारी नजर महज 6 फीसदी रोगियों के बजाय 100 फीसदी आबादी पर होगी जिसमें गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के अलावा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी शामिल होंगे। हमें मरीजों के इतर उभोक्ताओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने के लिए दक्षता (डिजिटल प्रौद्योगिकी) हासिल करना होगा। हमारे पास सही कीमत पर तंदुरुस्ती पैकेज और वार्षिक सबस्क्रिप्शन, लॉयल्टी प्रोग्राम आदि होने चाहिए। हम भारत में 100 से 200 प्रमुख शहरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भारत में 70 से 80 फीसदी शहरों में हमारे लैब हैं। अब अलगे चरण में हम 100 अन्य शहरों में लैब स्थापित करेंगे और 200 अन्य शहरों में नमूना संग्रह केंद्र खोलेंगे। हम काफी हद तक तकनीकी समर्थता हासिल करने पर ध्यान दे रहे हैं।

कोविड-19 के कारण मांग काफी बढ़ गई थी और इसलिए अतिरिक्त क्षमता स्थापित की गई थी। अब वित्त वर्ष 2023 में वृद्धि एवं लाभप्रदता कैसी रहेगी?
हमने वैश्विक महामारी के दौरान कोविड-19 क्षमताओं को जारी रखा था क्योंकि अचानक लहर आने की आशंका बनी रहती थी। हमने देश के 200 से अधिक शहरों में श्रमबल एवं जांच की लागत का वहन किया। ओमीक्रोन लहर 15 दिनों तक रही थी। सरकार ने रैपिड एंटीजेन टेस्ट की अनुमति दे दी थी। लोग इससे काफी सहज महसूस कर रहे थे, भले ही उसकी रिपोर्ट गलत क्यों न हो। अब काफी हद तक कोविड की जांच रैपिड एंटीजेन टेस्ट के जरिये होने लगी है। लेकिन सभी प्रयोगशालाओं को कोविड जांच ढांचे की लागत का वहन करना पड़ा।

First Published - June 15, 2022 | 12:47 AM IST

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