दिग्गज मोबाइल रिटेलिंग कंपनियां अपना कारोबार चमकाने के लिए फ्रैंचाइजी के रास्ते को अपना रही हैं।
जहां बड़े मोबाइल स्टोर इस रास्ते पर चल पड़े हैं वहीं बंद होने के कगार पर खड़े छोटे मोबाइल आउटलेट भी अपना कारोबार जारी रखने के लिए इसे तवज्जो दे रहे हैं। स्पाइस ग्रुप के स्वामित्व वाली हॉटस्पॉट पूरे देश में 100 छोटे रिटेलरों को अपने ब्रांड फ्रैंचाइजी में पहले ही तब्दील कर चुकी है।
हॉटस्पॉट के मुख्य कार्यकारी संजीव महाजन ने कहा, ‘यह सामान्य धारणा है कि ब्रांडेड रिटेल स्टोर छोटे स्टोरों के लिए खतरा हैं। वैसे यह व्यवसाय पहले से ही कम मार्जिन वाला रहा है। हमें ग्राहक अनुभव की गुणवत्ता को ध्यान में रखना होगा। हमने एक चुनौतीपूर्ण मॉडल के रूप में फ्रैंचाइजी की तलाश की है।’
उन्होंने कहा, ‘हालांकि मोबाइल उद्योग की तेज विकास दर और ग्रामीण बाजारों में इसकी शानदार पैठ के साथ ऐसे बिजनेस मॉडल से हमें खासकर कस्बे और ग्रामीण बाजारों में पैठ मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।’ आम तौर पर फ्रैंचाइजी स्टोर के लिए तकरीबन 12-14 लाख रुपये की जरूरत पड़ती है जिसमें से 2 लाख रुपये ब्रांड शुल्क के तौर पर चुकाने पड़ते हैं।
जहां फ्रैंचाइजी बुनियादी सुविधाओं और स्टॉक के लिए भुगतान करते हैं वहीं सभी प्रोत्साहन और विपणन खर्च बड़े ब्रांड स्टोर चेन की ओर से वहन किया जाता है। छोटे रिटेलर फ्रैंचाइजी मॉडल के जरिये अपने निवेश पर तकरीबन 60 फीसदी का प्रतिफल हासिल कर सकते हैं।
इस उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह रिटेलरों को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए उपयुक्त रास्ता है। यह मॉडल छोटे रिटेलरों को रिटेल क्रांति का हिस्सा बनने का मौका मुहैया कराएगा। केपीएमजी एडवायजरी सर्विसेज के निदेशक जयदीप घोष ने कहा, ‘ऐसे फ्रैंचाइजी मॉडलों में रिटेलरों की ओर से किया जा रहा निवेश काफी कम है। यह मॉडल ग्रामीण और छोटे शहरों में अत्याधुनिक मॉल में दुकानें स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है।’
इसी तरह आरपीजी सेल्युकॉम फ्रैंचाइजी मॉडल की संभावना तलाश रही है। आरपीजी सेल्युकॉम के प्रमुख (मार्केटिंग) बिस्वजीत पांडे ने बताया, ‘बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा ग्राहक को श्रेष्ठ कीमत मुहैया कराना है। हम अपनी कंपनी के स्वामित्व वाले स्टोरों का संचालन कम से कम इस वित्तीय वर्ष के अंत तक जारी रखेंगे। एक बार जब हम ब्रांड के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे तो हम फ्रैंचाइजी के रास्ते पर विचार करेंगे।’