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उद्यमों के लिए आशा की नई किरण

Last Updated- December 07, 2022 | 7:06 PM IST

भारत सरकार के  कुटीर, छोटे और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा घोषित नई योजना से यह उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश के कुटीर, छोटे और मझोले उद्यमों को एक नया जीवन मिल सकेगा।


प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) नामक इस योजना से ग्रामीण और शहरी इलाकों में लघु उद्यमों की स्थापना कर रोजगार की अवसर पैदा किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इस नई योजना का सृजन केंद्र सरकार की दो योजनाओं-प्रधानमंत्री रोजगार योजना (पीएमआरवाई) और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (आरईजीपी) के विलय से हुआ है, जो 31 मार्च 2008 तक संचालित था।

इस योजना के तहत पूरे देश भर में लघु उद्यमों की स्थापना के लिए 15,000 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमानित की गई है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के राज्य निदेशक आर एस पाण्डे ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘योजना से जुड़े कुछ दिशा-निर्देशों को पूरा किया जाना बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा और उसके बाद उन निर्देशों को सभी केवीआईसी केंद्र के पास भेज दिया जाएगा।’

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) एममात्र ऐसी नोडल एजेंसी होगी जो राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना का कार्यान्वयन करेगी। मालूम हो कि केवीआईसी एसएसएमई मंत्रालय की एक सांविधिक निकाय है। पाण्डे ने बताया, ‘हमें उम्मीद है कि इस योजना के लिए जितनी धनराशि अनुमानित की गई है, उसमें हमारा कम से कम 18 फीसदी हिस्सेदारी होगा। इसमें कोई शक नहीं कि इस योजना से एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार सृजन में काफी मदद मिलेगी।’ बहरहाल, विनिर्माण सेक्टर में परियोजना लागत की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये हो सकती है जबकि बिानेस या सर्विस सेक्टर में 10 लाख रुपये हो सकती है।

First Published - August 31, 2008 | 10:54 PM IST

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