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अब आईबीएम ने भी जताया दोहरी नौकरी पर विरोध

Last Updated- December 11, 2022 | 3:35 PM IST

विप्रो के ऋषद प्रेमजी और इन्फोसिस के मूनलाइटिंग पर कड़ा रुख अपनाने के बाद, बहुराष्ट्रीय आईटी सेवा फर्म आईबीएम ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई।
आईबीएम इंडिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने कहा कि कंपनी ने ठीक वैसा ही फैसला लिया है जैसा कि प्रेमजी जैसे उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं ने लिया था। 
 पटेल ने कंपनी के प्रमुख कार्यक्रम आईबीएम थिंक में कहा, ‘हमारे सभी कर्मचारी जब वे कार्यरत होते हैं तो वे एक समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं, जो कहता है कि वे आईबीएम के लिए काम करने जा रहे हैं। इसलिए हम इस बात की परवाह किए बिना कि लोग अपने बाकी समय के साथ क्या कर सकते हैं। कंपनी में काम करने के बाद बाकी समय में किसी और के लिए काम करना नैतिक रूप से सही नहीं है।’ इसे ही मूनलाइटिंग कहा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईबीएम में लगभग 140,000 भारतीय कर्मचारी हैं।
स्विगी द्वारा अपने कर्मचारियों को मूनलाइटिंग की अनुमति देने के बाद यह एक अवधारणा के रूप में आ गई।  कई कंपनियों का मानना ​​​​है कि वर्क फ्रॉम होम के कारण कर्मचारियों को अन्य अवसरों द्वारा धन कमाने का विकल्प मिल सकता है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि कोई दोहरा जीवन नहीं है और कर्मचारी हैंडबुक और आचार संहिता के अनुसार एक साथ दो रोजगार की अनुमति नहीं है।
ईमेल में कहा गया है कि ऑफर लेटर में मूनलाइटिंग की मनाही के नियम का जिक्र है और कंपनी की सहमति जरूरी है। सहमति किसी भी नियम और शर्तों के अधीन दी जा सकती है जिसे कंपनी उचित समझ सकती है और कंपनी के विवेक पर किसी भी समय वापस ली जा सकती है
प्रेमजी ने 20 अगस्त को एक ट्विटर पोस्ट में मूनलाइटिंग की अवधारणा को खारिज कर दिया और इसे ‘छल’ करार दिया।
 

First Published - September 14, 2022 | 10:24 PM IST

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