facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वैश्विक मंदी की आहट? टैरिफ वॉर के बीच क्रूड ऑयल की कीमत 2021 के निचले स्तर की ओर, तेल की कीमतें 8% तक लुढ़की

Advertisement

बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसके बाद चीन ने भी जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।

Last Updated- April 04, 2025 | 7:13 PM IST
crude oil price
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pixabay

Trump Tariffs: चीन द्वारा अमेरिका के ऊपर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतें 8 प्रतिशत तक गिर गईं। यह 2021 में कोरोना वायरस महामारी के बीच के सबसे निचले स्तर की ओर बढ़ रही है। बता दें कि बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसके बाद चीन ने भी आज जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। चीन ने घोषणा की कि वह 10 अप्रैल से अमेरिकी सामानों पर 34 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाएगा। ट्रंप द्वारा शुल्क की दरों को एक सदी से अधिक के उच्चतम स्तर तक बढ़ाने के बाद, दुनिया भर के देशों ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी की है, जिसके कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी गिरावट देखी गई।

ब्रेंट फ्यूचर्स (Brent futures) 5.30 डॉलर, (1254 GMT) यानी 7.6 प्रतिशत, गिरकर 64.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 5.47 डॉलर, यानी 8.2 प्रतिशत, गिरकर 61.48 डॉलर पर पहुंच गए। दोनों बेंचमार्क दो साल से अधिक समय में प्रतिशत के हिसाब से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहे थे।

एक्सपर्ट का क्या है मानना?

सैक्सो बैंक के कमोडिटी रणनीति प्रमुख ओले हैंनसेन ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “चीन का अमेरिकी शुल्कों के खिलाफ आक्रामक जवाबी कदम लगभग पक्का करता है कि हम एक वैश्विक व्यापार युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। यह ऐसा युद्ध है जिसमें कोई विजेता नहीं होगा और जो आर्थिक विकास और कच्चे तेल व रिफाइंड उत्पादों जैसी प्रमुख कमोडिटीज की मांग को नुकसान पहुंचाएगा।”

तेल की आपूर्ति को बढ़ावा देने वाला कारण ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) और इसके सहयोगियों का फैसला था। OPEC और इसके सहयोगियों ने उत्पादन बढ़ाने की योजना को आगे बढ़ाया, और अब समूह मई में बाजार में 411,000 बैरल प्रति दिन (bpd) लाने का टारगेट लेकर चल रही है, जो पहले की योजना 135,000 बैरल प्रति दिन से अधिक है। हालांकि, ट्रंप के नए टैरिफ में तेल, गैस और रिफाइंड उत्पादों के आयात को छूट दी गई थी, लेकिन इस फैसले से महंगाई बढ़ सकती है। साथ ही इससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है और व्यापार में होने वाले विवादों को बढ़ावा मिल सकता है, जिसका असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने दिसंबर 2025 के लिए अपने ब्रेंट और WTI टारगेट को 5-5 डॉलर घटाकर क्रमशः 66 और 62 डॉलर कर दिया।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - April 4, 2025 | 7:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement