प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की वित्तीय सुरक्षा और नकदी की स्थिति कमजोर होने की संभावना है। हालांकि एसऐंडपी ग्लोबल ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कंपनी के मजबूत बैंकिंग संबंध और फंडिंग बाजारों तक पहुंच के कारण नकदी की कम अवधि का दबाव कम हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कंपनी के पास बैंकों के साथ उपलब्ध प्रतिबद्ध और गैर-प्रतिबद्ध कार्यशील पूंजी है। उसने कमर्शल पेपर जारी कर फंड जुटाने का बेहतर रिकॉर्ड बनाया है। हमारे विचार में ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल), और गेल (इंडिया) लिमिटेड में आईओसीएल की अल्पांश हिस्सेदारी से जरूरी पड़ने पर मदद मिलेगी, जिनका संयुक्त बाजार मूल्य 3 अरब डॉलर से अधिक है।’
कच्चे तेल की उच्च कीमतों के बीच बढ़ते नुकसान के कारण इंडियन ऑयल ने भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। एसऐंडपी ने कहा कि यदि कंपनी वित्तीय तनाव में आती है तो इंडियन ऑयल को भारत सरकार से असाधारण सहायता मिल सकती है। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को राहत प्रदान करने के लिए हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के नतीजे एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की उम्मीदों से बेहतर रहे, जिसमें 400 अरब रुपये का फ्री ऑपरेटिंग कैश फ्लो और लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का समायोजित ऋण था।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मात्रा में बेहतर वृद्धि, उच्च रिफाइनिंग मार्जिन और कार्यशील पूंजी लाभ के परिणामस्वरूप वर्ष के लिए एबिटा 760 अरब रुपये से अधिक रहा। मजबूत आय वृद्धि और विस्तार पर कंपनी के अनुशासित खर्च को देखते हुए हमारा अनुमान है कि आईओसीएल का समायोजित ऋण एबिटा अनुपात वित्त वर्ष 2026 में पिछले वित्त वर्ष के 2.2 की तुलना में 2 गुना से नीचे गिर गया है।’