तेल-गैस

गैस संकट के बीच PNG की रफ्तार: 5.27 लाख घरों में पहुंची पाइप वाली गैस, 42 हजार LPG कनेक्शन सरेंडर

खाना पकाने की गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने देश भर में पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस को अपनाने पर जोर दिया है, ताकि एलपीजी आपूर्ति से दबाव कम हो सके

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- April 24, 2026 | 11:24 PM IST

देश में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच बीते मार्च महीने से अब तक लगभग 5.27 लाख पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों को गैस उपलब्ध कराई गई है। यही नहीं लगभग 2.60 लाख नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा चुका है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को अंतर-मंत्रालयीय संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 23 अप्रैल तक 42,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण खाना पकाने की गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने देश भर में पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस को अपनाने पर जोर दिया है, ताकि एलपीजी आपूर्ति से दबाव कम हो जाए।

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से ही भारत एलपीजी या खाना पकाने की गैस की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। भारत में कुल एलपीजी आयात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी पश्चिम एशिया की है और युद्ध के कारण वहां से आपूर्ति बाधित हो गई है।

सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में वृद्धि की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां  बीते 1 अप्रैल से अब तक 5 किलोग्राम एफटीएल वाले 17.83 लाख सिलिंडर बेच चुकी हैं, जबकि 23 अप्रैल को ऐसे 81,000 से अधिक सिलेंडर ग्राहकों को दिए गए।

सरकार ने कहा कि 5 किलोग्राम एफटीएल सिलिंडर राज्य सरकारों के निपटान पर हैं, जिन्हें तेल विपणन कंपनियों की सहायता से केवल प्रवासी मजदूरों को आपूर्ति किया जाना है। एलपीजी संकट शुरू होने से सबसे अधिक यही वर्ग प्रभावित हुआ है, जिनके पास अपना गैस कनेक्शन नहीं होता है।

First Published : April 24, 2026 | 10:25 PM IST