देश में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच बीते मार्च महीने से अब तक लगभग 5.27 लाख पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों को गैस उपलब्ध कराई गई है। यही नहीं लगभग 2.60 लाख नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा चुका है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को अंतर-मंत्रालयीय संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 23 अप्रैल तक 42,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण खाना पकाने की गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने देश भर में पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस को अपनाने पर जोर दिया है, ताकि एलपीजी आपूर्ति से दबाव कम हो जाए।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से ही भारत एलपीजी या खाना पकाने की गैस की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। भारत में कुल एलपीजी आयात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी पश्चिम एशिया की है और युद्ध के कारण वहां से आपूर्ति बाधित हो गई है।
सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में वृद्धि की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां बीते 1 अप्रैल से अब तक 5 किलोग्राम एफटीएल वाले 17.83 लाख सिलिंडर बेच चुकी हैं, जबकि 23 अप्रैल को ऐसे 81,000 से अधिक सिलेंडर ग्राहकों को दिए गए।
सरकार ने कहा कि 5 किलोग्राम एफटीएल सिलिंडर राज्य सरकारों के निपटान पर हैं, जिन्हें तेल विपणन कंपनियों की सहायता से केवल प्रवासी मजदूरों को आपूर्ति किया जाना है। एलपीजी संकट शुरू होने से सबसे अधिक यही वर्ग प्रभावित हुआ है, जिनके पास अपना गैस कनेक्शन नहीं होता है।