कोल इंडिया ने पिछले दो महीनों में कोयला आयात के लिए जो निविदा जारी की उसमें से बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) ने कुल ऑर्डर मूल्य का महज 5.8 फीसदी कोयला लिया। कोल इंडिया के अधिकारियों ने कहा कि कंपनी ने 1.2 करोड़ टन कोयले के आयात के लिए निविदा जारी की थी मगर गिनी-चुनी बिजली उत्पादक कंपनियों से केवल 7 लाख टन आपूर्ति का अनुरोध मिला है। बिजली कंपनियों को देसी कोयले में एक निश्चित मात्रा में आयातित कोयला मिश्रित करना आवश्यक है।
कोल इंडिया के निदेशक (तकनीकी) बी वीरा रेड्डी ने बताया, ‘हमें बिजली उत्पादकों से 14 लाख टन कोयले का ऑर्डर मिला था मगर बाद में 7 लाख टन का अनुरोध वापस ले लिया गया। बाकी 7 लाख टन में अगस्त तक 3.5 लाख टन कोयले की आपूर्ति की जा चुकी है और 3.5 लाख टन भेजा जा रहा है।’ जून में जब कोल इंडिया ने पहली बार आयातित कोयले के लिए निविदा जारी की थी तो राज्य एवं निजी क्षेत्र की बिजली उत्पादकों की रुचि को देखते हुए उसने 26 लाभार्थियों को चिह्नित किया था। इसने अगस्त तक तमिलनाडु जेनरेशन ऐंड डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी, कोलकाता की सीईएससी, छत्तीसगढ़ की डीबी पावर और कोयला वॉशरीज कंपनी एसीबी को 3.5 लाख टन कोयले की आपूर्ति की है।
रेड्डी ने आगे कहा, ‘शुरुआत में 14 लाख टन कोयला आयात करने की निविदा को कोल इंडिया ने रद्द कर दिया था क्योंकि कोयले का दाम काफी ज्यादा था।’ उन्होंने कहा कि उसके बाद अगले साल तक के लिए कुल 1.2 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति मध्यम अवधि में किए जाने का ऑर्डर दिया क्योंकि केंद्र ने अनुमान लगाया था कि आयातित कोयले की मांग ज्यादा होगी। इनमें से 60-60 लाख टन कोयला पूर्वी और पश्चिमी तट में आना था। मगर कोल इंडिया इन अनुबंधों से केवल 7 लाख टन की आपूर्ति कर रही है। केंद्र ने अनुमान लगाया था कि मई में घरेलू कोयले की कमी के कारण 3.8 करोड़ टन आयातित कोयले की जरूरत होगी।
मध्यम अवधि की निविदा के लिए इंडोनेशिया की कंपनी बारा डेया एनर्जी ने सबसे कम दाम की बोली लगाई थी। हालांकि सबसे कम बोली अदाणी एंटरप्राइजेज की थी मगर कोल इंडिया ने उसे खारिज कर दिया था। घरेलू कोयले की आपूर्ति बढ़ने और तापमान घटने से देश भर में बिजली की मांग घटने लगी, जिससे आयातित कोयले की मांग भी कम हो गई। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि बिजली संयंत्रों के पास फिलहाल 2.6 करोड़ टन घरेलू कोयले का भंडार है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब तिगुना है।
इस साल मई में बिजली मंत्रालय ने कोल इंडिया को राज्य तथा निजी बिजली उत्पादकों के लिए कोयला आयात करने का निर्देश दिया था। राज्य की बिजली कंपनियों और निजी उत्पादकों को घरेलू कोयले में 10 फीसदी आयातित कोयला मिलने का निर्देश दिए जाने के बाद मंत्रालय ने यह कदम उठाया था।
मगर बाद में निविदा को रोकने के लिए कहा गया। कई राज्यों ने आयातित कोयला लेने में अनिच्छा जाहिर की और कोल इंडिया से वैश्विक बाजारों से ड्राई ईंधन की व्यवस्था करने के लिए कहा। अगस्त में बिजली मंत्रालय ने आयातित कोयले के मिश्रण की अनिवार्यता खत्म कर दी और कहा कि जरूरत पड़ने पर बिजली उत्पादक कोयले का आयात कर सकते हैं।
कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर 2 करोड़ टन कोयले के आयात की निविदा में से 15 सितंबर तक 1.1 करोड़ टन कोयले का उपयोग किया गया। इनमें से एनटीपीसी, राजस्थान, तमिनलाडु, पंजाब, गुजरात तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों द्वारा आयात किया गया कोयला भी शामिल है।