टाटा स्टील के ब्रिटिश कारोबार की किस्मत का फैसला अब अगले प्रधानमंत्री लेंगे। नए प्रधानमंत्री को फैसला लेना है कि कंपनी को 1.5 अरब पाउंड की सब्सिडी दी जाए या या कंपनी को बंद होने दिया जाए।
यह संकेत ब्रिटिश वाणिज्य मंत्री के क्वार्टेंग ने दिया, जब टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगले एक साल में ब्रिटिश स्टील संयंत्र के लिए सब्सिडी जरूरी है ताकि इस संयंत्र को चालू रखा जा सके या फिर यह संयंत्र बंद हो जाएगा।
फाइनैंशियल टाइम्स ने शनिवार को खबर दी है कि क्वार्टेंग का रुख अहम है क्योंकि यदि विदेश मंत्री लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनती हैं तो वह अगले चांसलर बन सकते हैं। दिलचस्प यह है कि ट्रस ने करों में कटौती पर जोर दिया है। नए टोरी नेता की घोषणा 5 सितंबर को की जाएगी। टाटा स्टील की ब्रिटिश इकाई की निर्माण क्षमता 50 लाख टन है और इसमें 8,000 कर्मचारी काम करते हैं, जबकि नीदरलैंड के संयंत्र की क्षमता 70 लाख टन है और उसमें 9,000 लोग काम करते हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई परिचालन की अन्य 17 लाख टन क्षमता है। ब्रिटेन और डच में परिचालन टाटा स्टील नीदरलैंड के तहत किया जाता है। टाटा स्टील-यूके को अपने पोर्ट टालबॉट संयंत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए सब्सिडी की जरूरत होगी।
रेटिंग फर्म मूडीज के विश्लेषकों ने हाल में कहा था कि टाटा स्टील के यूरोपीय परिचालन में वर्टिकल इंटिग्रेशन के अभाव को देखते हुए वह अनुमानों को लेकर सतर्क बने हुए हैं और उनका मानना है कि प्रति टन एबिटा 2022 के 180 डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2023 में करीब 140-150 डॉलर तथा वर्ष 2024 में महज 40-50 डॉलर रह जाएगा।