तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) ने अंगोला में हाल ही में खोजे गए तेल ब्लॉक में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है।
कंपनी ने इसके लिए बोली भी लगा दी है। ओवीएल के अलावा चीन की दो बड़ी कंपनियां भी पिछले महीने लगभग 6,400 करोड़ रुपये की बोली इस तेल ब्लॉक के लिए लगा चुकी हैं। ओवीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।
पिछले एक महीने में ओवीएल की यह दूसरा बड़ा दांव होगा। इससे पहले उसने ब्रिटेन की तेल-गैस कंपनी इंपीरियल एनर्जी को भी खरीदने के लिए बोली लगाई है। इंपीरियल के मामले में सब उसी को संभावित खरीदार मान भी रहे हैं।
हालांकि अभी इस बोली की कीमत के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि चीन की साइनोपेक और चाइनीज नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉर्पोरेशन की संयुक्त बोली यानी 6,400 करोड़ रुपये से यह ज्यादा ही है।
ओएनजीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आर एस शर्मा ने अंगोला के तेल ब्लॉकों की बोली के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। शर्मा ओवीएल के गैर कार्यकारी चेयरमैन भी हैं। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड को वह पहले भी बता चुके हैं कि ओवीएल इंपीरियल एनर्जी का अधिग्रहण करने के बाद भी विदेशों में तेल और गैस संपदा की तलाश जारी रखेगी।
अंगोला ब्लॉक 32 में ओवीएल ने 20 फीसद हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई है। इसका स्वामित्व फ्रांस की कंपनी टोटल एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन अंगोला के पास है। इसमें अमेरिका की कंपनी मैराथन ऑयल की भी हिस्सेदारी है। वह अपनी 20 फीसद हिस्सेदारी बेच रही है। लेकिन बिक्री के बाद भी इसमें मैराथन की 10 फीसद हिस्सेदारी रहेगी। मैराथन ऑयल ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
ओएनजीसी और ओवीएल के शीर्ष तीन अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि अंगोला ब्लॉक 32 गैस-तेल के मामले में बेहद समृद्ध है। मैराथन की वेबसाइट के मुताबिक इस ब्लॉक में 12 कुंओं में तेल मिल चुका है। अमेरिका में मैराथन तेल उत्खनन और रिफाइन करने वाली पांचवी सबसे बड़ी कंपनी है। अलास्का, मेक्सिको की खाड़ी और नार्वे के पास उत्तरी सागर में उसके पास तेल भंडार हैं।
बताया जाता है कि अंगोला ब्लॉक 32 में तकरीबन 150 करोड़ बैरल तेल का भंडार है। यहां 2012 में उत्पादन शुरू होने के आसार हैं। इसका मतलब है कि अंगोला ब्लॉक के पास केयर्न इंडिया के राजस्थान में स्थित तेल भंडार से भी ज्यादा बड़ा भंडार है। भारत के तेल उत्पादन में यह 20 फीसद योगदान कर सकता है।
ओवीएल के प्रबंध निदेशक आर एस बुटोला ने पिछले हफ्ते कहा था कि अंगोला ब्लॉक में मैराथन ऑयल की 20 फीसद हिस्सेदारी हासिल करने की होड़ अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन उन्होंने हिस्सेदारी के लिए ओवीएल की बोली का जिक्र नहीं किया था।
ओवीएल ने चीनी समूह की बोली को टक्कर देते हुए अंगोला के लिए जो बोली लगाई है, जानकार उसे कंपनी के बदलते तेवरों का सबूत मान रहे हैं। इंपीरियल के बाद अब अंगोला की बोली से साबित हो गया है कि कंपनी विदेशों में तेल भंडारों पर धावा बोल चुकी है।