फ्रांस की शराब बनाने वाली दिग्गज कंपनी परनो रिकार्ड की भारतीय इकाई पर शराब कंसंट्रेशन आयात का कम मूल्यांकन करने के आरोप में भारतीय सीमा शुल्क अधिकारियों ने 24.4 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है। सरकार द्वारा जारी नोटिस में बताया गया है कि कंपनी सेवा कर बचाने के लिए दशकों से आयात का कम मूल्यांकन कर रही थी।
परनो के लिए यह बड़ा झटका है और लंबे समय से शराब के आयात मूल्यांकन के संबंध में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कर अधिकारियों से लॉबिंग की कोशिश कर रही थी। परनो के लिए यह सबसे हालिया असफलता रही है। पहले भी शिवास रीगल और वोदका बनाने वाली इस कंपनी ने कहा था कि इस विवाद के कारण कंपनी ने भारत में निवेश करने पर रोक लगा दी है।
परनो भारत सहित दुनिया भर की दूसरे नंबर की सबसे बड़ी शराब विक्रेता कंपनी है। भारतीय सीमा शुल्क अधिकारियों ने 27 जून को शराब से संबंधित नोटिस जारी कर परनो की इंग्लैंड आधारित सहायक कंपनी शिवास ब्रदर्स के शराब आयात पर रोक लगा दिया था। परनो ने कर की मांग को न्यायालय में चुनौती दी है, मामला मंगलवार को सुना जाएगा।
अधिक कर और लंबे समय तक चलने वाला कानूनी विवाद विदेशी कंपनियों के लिए हमेशा चिंता का विषय रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला इंक कार के आयात को लेकर कई वर्षों से भारत पर ज्यादा कर वसूलने का आरोप लगा रही है।
नोटिस में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों ने जांच के दौरान पाया कि परनो रिकार्ड इंडिया ने 2009-10 से 2020-21 के बीच में हुए शराब कंसंट्रेशन के आयातों का कम मूल्यांकन किया था, जिसके कारण इस पर कम आयात शुल्क लगा।
कंपनी पर 2020 तक 20.1 अरब रुपये का अतिरिक्त सेवा कर है, इसके साथ ही स,आयात पर कर भी जुड़ेगा। नोटिस में कहा गया है कि परनो इंडिया ने कम मूल्यांकन की क्षतिपूर्ति करने के लिए समूह ने फ्रांस की अपनी होल्डिंग कंपनी परनो रिकार्ड को भारी-भरकम लाभांश दिया।