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एक बाजार की तलाश में योजना

Last Updated- December 11, 2022 | 2:21 PM IST

 मुबई की इंडियन सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (आईएसएमसी) और सिंगापुर की आईजीएसएस वेंचर्स की एक रणनीति समान है। दोनों कंपनियों ने सेमीकंडक्टर फैब प्लांट के लिए अपने आवेदन में सरकार से कहा है कि वह शुरुआती पांच या दस साल तक भारत में बनने वाले अधिकांश चिप का निर्यात करेगी।
तीसरी आवेदक वेदांत-फॉक्सकॉन है, जो एक फैब प्लांट बना भी रही है। वेदांत-फॉक्सकॉन ने कहा है कि यह उपभोक्ता की जरूरतों के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल डिवाइस बाजारों पर ध्यान केंद्रित करेगी, और घरेलू खपत के लिए 80 फीसदी उत्पादन निर्धारित करेगी। 
सेमीकंडक्टर विनिर्माण में भारत के नए सिरे से प्रयास के लिए एक अनुकूल घरेलू बाजार खोजना सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। फैब प्लांट सीधे अंतिम उपयोगकर्ताओं को नहीं बल्कि मध्यवर्ती चिप डिजाइन कंपनियों, जैसे- क्वालकॉम या मीडियाटेक को बेचते हैं। उनके द्वारा बनाई गई चिप को फिर अन्य कंपनी द्वारा असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) करके संसाधित किया जाता है। इसके लिए टाटा समूह एक फर्म स्थापित कर रहा है। इन प्रक्रियाओं के बाद इसे अंतिम उपयोगकर्ता को भेज दिया जाता है। कई वैश्विक फैब प्लांट में एटीएमपी संचालन होता है कुछ इसे अन्य कंपनियों को आउटसोर्स करते हैं।
भारत में समस्या यह है कि यहां घरेलू चिप डिजाइन करने वाली बड़ी कंपनियां नहीं हैं, जो देश में फैब प्लांट स्थापित करने के लिए ठोस रकम प्रदान कर सके। कुछ छोटी कंपनियां हैं जिनका कुल राजस्व 2-3 करोड़ डॉलर है। विदेशी चिप डिजाइन कंपनियां भारत में अपने उत्पादों को वैश्विक दिग्गजों जैसे ताइवान में टीएसएमसी के माध्यम से बेचती हैं, और बड़े पैमाने के फायदे प्राप्त करती हैं। विडंबना यह है कि ये कंपनियां अपनी चिप का एक बड़ा हिस्सा भारतीय अनुसंधान एवं विकास केंद्रों में भी डिजाइन करती हैं लेकिन उनके बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) भारत का नहीं, बल्कि वैश्विक है। भारत में खपत होने वाले 5 फीसदी से भी कम चिप को घरेलू कंपनियों के स्वामित्व वाले आईपी के साथ डिजाइन किया गया है। 
लेकिन सरकार की सेमीकंडक्टर योजना से अलग उम्मीद है। 50 फीसदी सब्सिडी के साथ आने वाले फैब प्लांट का उद्देश्य भारत को चिप में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार स्थानीय बाजार में बड़ी संभावना देख रही है। इसके 2026 तक चिप बाजार के 65 अरब डॉलर या इससे अधिक भी पहुंचने का अनुमान है।
यहां तक पहुंचने के लिए शुरुआती चुनौतियों से अवगत, सरकार ने 20 घरेलू चिप डिजाइन कंपनियों को सहायता देने के लिए एक डिजाइन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना बनाई है। उन्हें उनके उपयुक्त व्यय का 50 फीसदी सरकार की तरफ से प्रदान किया जाएगा, लेकिन इसकी भी एक सीमा होगी। इसके साथ ही उन्हें पांच साल के लिए शुद्ध बिक्री कारोबार पर 4-6 फीसदी की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। 
लेकिन घरेलू चिप डिजाइनरों को उभरने में समय लगेगा। आईएसएमसी कंसोर्टियम का नेतृत्व करने वाले न्यू ऑर्बिट के संस्थापक अजय जालान ने कहा कि शुरुआती पांच से 10 वर्षों के लिए, अधिकांश चिप निर्यात की जाएंगी क्योंकि भारत में अभी तक कोई बड़ी चिप डिजाइन कंपनियां नहीं हैं। कुल उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा टावर सेमीकंडक्टर लेगी। हम अन्य वैश्विक कंपनियों से भी इसे खरीदने पर बात कर रहे हैं। टावर सेमीकंडक्टर एक इंटेल सहायक और न्यू ऑर्बिट की टेक्नॉलजी पार्टनर है, जो बाद में न्यू ऑर्बिट में निवेश कर सकती है।
आईजीएसएस के संस्थापक राज कुमार ने कहा कि वेफर का 20 प्रतिशत (40,000 वेफर प्रति माह) अमेरिका में स्थित एक एकीकृत डिजाइन निर्माता (आईडीएम) भागीदार द्वारा वापस खरीदा जाएगा, और अन्य 40 फीसदी सिलिकन फोटोनिक्स, पावर टेक्नॉलजी और गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर के वैश्विक खरीदारों द्वारा खरीदा जाएगा। 
दूसरे शब्दों में, फैब प्लांट्स के लिए पूंजी निवेश को प्रोत्साहन देना पर्याप्त नहीं हो सकता है। इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सेमीकंडक्टर असोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सत्य गुप्ता ने बताया कि चिप बनाने वाले फैब प्लांट के लिए लागत में कमी को पूरा करने के लिए हमें एक प्रोत्साहन योजना की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का पैमाना नहीं है जो टीएसएमसी प्रदान करता है, या वैश्विक चिप डिजाइन कंपनियों को आकर्षित किया जा सकता है कि वे शुरू में भारत की जरूरतों के लिए अपने कुछ प्लांट को भारत में स्थानांतरित कर लें। हालांकि, संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि सरकार इस रास्ते को बिल्कुल भी नहीं अपनाएगी।
गुप्ता ने कहा कि वेदांत-फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है। फॉक्सकॉन दुनिया भर में एक अनुबंध निर्माता के रूप में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल डिवाइस कंपनियों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाकर उन्हें अपने भारतीय संयंत्र से कुछ चिप खरीदने के लिए प्रेरित कर सकती है।
वैश्विक चिप डिजाइन कंपनियों ने माना है कि वे भारत में अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए तैयार हैं। ताइवान की चिप डिजाइन कंपनी मीडियाटेक के कॉरपोरेट मार्केटिंग के उपाध्यक्ष फिनबार मोयनिहान ने कहा था कि जब भी भारतीय फैब प्लांट तैयार होंगे, कंपनी आउटसोर्सिंग चिप उत्पादन पर विचार करेगी। उन्होंने तर्क दिया है कि उत्पादन उन स्थानों के करीब होना चाहिए, जहां ग्राहक घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों के लिए मोबाइल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक्स बना रहा हो। 
लेकिन वैश्विक चिप निर्माताओं के पास कुछ शर्तें हैं जिन्हें पूरा करने की आवश्यकता है। जैसे, कीमत वैश्विक स्तर पर तय होनी चाहिए, ताकि यह समय पर अपने ऑर्डर पूरा कर सके।
कुछ फैब प्लांट आवेदक अन्य समाधान सुझाते हैं। न्यू ऑर्बिट के जालान ने कहा कि एक बार देश में उचित संख्या में फैब आने के बाद, सरकार डेटा स्थानीयकरण नीति की तर्ज पर एक चिप स्थानीयकरण नीति ला सकती है। जिसका अर्थ है कि देश में कंपनियों को स्थानीय फैब संयंत्रों से खरीदने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योग को अरबों डॉलर की सब्सिडी देने वाले अमेरिका या यूरोप भी अपनी कंपनियों को ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

First Published - October 2, 2022 | 11:05 PM IST

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