पश्चिम बंगाल में नैनो बनाने की अपनी सिंगुर परियोजना पर काम रोकने के टाटा मोटर्स के फैसले से हैरान कॉर्पोरेट जगत और राजनेताओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण ठहराया है।
तमाम हस्तियों ने यही कहा है कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए यह अच्छा नहीं है। दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा के अध्यक्ष (ऑटोमोटिव) पवन गोयनका ने एक सम्मेलन के दौरान कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इस तरह की परियोजना को जगह से हटने के लिए सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘यह औद्योगिकीकरण के लिए शुभ संकेत नहीं है।’ यह पूछे जाने पर कि टाटा के परियोजना को राज्य में वापस लेने का देश में वैश्विक निवेश पर क्या असर पड़ सकता है, गोयनका ने कहा, ‘मुझे विश्वास नहीं है कि एक परियोजना का ऐसा असर हो सकता है।’
केन्द्रीय वाणिज्य सचिव गोपाल के पिल्लै का कहना है कि टाटा का सिंगुर में अपने कार संयंत्र का काम रोक देने के फैसले से पश्चिम बंगाल पर बुरा असर पड़ सकता है। पिल्लै का कहना है, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन इसकी उम्मीद पहले से ही थी। इसका राज्य पर बुरा असर पड़ेगा, लेकिन यह ऐसा नहीं है जिसे आप सोच सकें कि हर मामले में ही ऐसा होगा। यह सिर्फ भूमि अधिग्रहण या मुआवजे का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीति भी काम कर रही थी।’
उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि राज्य में आगे निवेश को धक्का पहुंचेगा और मन खट्टा हो जाएगा। फिक्की का कहना है कि महासंघ चाहता है टाटा नैनो कार अपनी योजना के मुताबिक ही आगे बढ़े, फिर चाहे किसी और संयंत्र से उत्पादन को शुरू करना पड़े। फिक्की के अध्यक्ष और सांसद राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि काम को रोका जाना और परियोजना के यहां से हटना बेशक बदकिस्मती की बात है।
उन्होंने कहा, ‘हम चाहते थे कि सिंगुर मसला इस मुकाम तक न पहुंचे और मेरा मानना है कि अगर निवेशकों, सरकार और स्थानीय समुदाय के बीच पहले ही बेहतर और खुली बातचीत हो जाती तो ऐसा न होता।’ जनरल मोटर्स के निदेशक एवं उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट मामले), पी बालेंद्रन ने कहा, ‘सिंगुर में काम रोके जाने के इस कदम से पश्चिम बंगाल को निवेश के लिहाज से देखने वाले भावी निवेशकों को गलत संकेत मिलेगा। निवेशक आगे पश्चिम बंगाल में निवेश को लेकर मन बदल सकते हैं।’
भूषण स्टील के प्रबंध निदेशक नीरज सिंघल ने कहा, ‘टाटा समूह क्या कर रहा है, इसके बावजूद हम बंगाल में अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएंगे। इसका असर हमारी परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा। हम पहले ही बंगाल में जमीन खरीदने की कोशिशों में हैं।’
अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक आर शेषासयी का कहना है, ‘राजनीति को उचित आर्थिक निर्णयों के बीच में नहीं आना चाहिए। इस स्थिति से पता चलता है कि राजनैतिक पार्टियां फैसला लेने और देशहित में समाधान निकालने पर पूरा ध्यान नहीं दे रही हैं। मुख्य परियोजना होने की वजह से दुनिया की इस पर नजर है और इस मसले से दुनिया के बाकी हिस्सों को गलत संकेत मिल रहे हैं।’
‘यह टाटा के लिए स्पष्ट बुरी किस्मत की बात है। यह बुरी बात है कि इस मसले में रतन टाटा जैसे दृष्टा को उलझाया जा रहा है। हालांकि मुझे नहीं लगता कि इसका पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास पर कोई असर पड़ेगा।’ – वेणुगोपाल धूत, चेयरमैन, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज
‘राज्य में राजनीति जोरों पर है। अब इस कदम के बाद संयंत्र को कहीं और लगाना में समय और पैसा दोनों लगेंगे।’ – वेणु श्रीनिवासन, मुख्य कार्यकारी निदेशक, टीवीएस मोटर्स
‘सरकार ही थी, जिसने टाटा को सिंगुर में नैनो संयंत्र लगाने के लिए बुलाया था। अगर कंपनी पश्चिम बंगाल से अपना हाथ खींच लेती है तो राज्य में आगे होने वाले निवेशों पर बुरा असर पड़ेगा। – ए एम नाइक, चैयरमैन, एलऐंडटी
‘यह गंभीर मुद्दा है। एक ऐसी प्रणाली की जरूरत है जिसके माध्यम से आसानी से औद्योगिक कार्यों के लिए कृषि योग्य जमीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिले।’ – सुनील कांत मुंजाल, प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यकारी, हीरो मैनेजमेंट सर्विसेज