लोकप्रिय पैरासिटामोल ब्रांड डोलो-650 बनाने वाली बेंगलूरु की दवा कंपनी माइक्रो लैब्स कथित कर चोरी मामले में जांच के दायरे में है। आयकर विभाग कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बहीखाते और वितरक नेटवर्क की छानबीन कर रहा है।
माइक्रो लैब्स कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान सुर्खियों में आई थी और उस दौरान कंपनी के पैरासिटामोल ब्रांड डोलो-650 की लोकप्रियता घर-घर तक पहुंच गई थी। जुलाई 2020 से जून 2021 के दौरान डोलो-650 ने 74 फीसदी की जबरस्त वृद्धि दर्ज की।
अनुसंधान एवं विश्लेषण फर्म अवाक्स की अध्यक्ष (विपणन) शीतल सापले ने कहा कि कोविड-पूर्व दौर में कंपनी के कुल कारोबार में डोलो का योगदान करीब 7 फीसदी रहता था। अब कंपनी के कुल कारोबार में डोलो का योगदान बढ़कर करीब 14 फीसदी हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘पैरासिटामोल बाजार में डोलो की बाजार हिस्सेदारी कोविड वैश्विक महामारी से पहले करीब 15 फीसदी थी जो अब बढ़कर 24 फीसदी हो चुकी है। उसने पैरासिटामोल बाजार में कालपोल को पछाड़ दिया है जिसकी बाजार हिस्सेदारी पिछले पांच साल के दौरान 20 से 22 फीसदी रही है।’
डोलो का सफर काफी दिलचस्प रहा है। डोलो-650 वास्तव में डोलोपर ब्रांड का उत्तराधिकार है जिसके साथ माइक्रो लैब्स ने 1973 में अपना कारोबारी सफर शुरू किया था। राजस्थान के अकाउंटेंट जीसी सुराणा ने रोजगार की तलाश में बेंगलूरु का रुख किया था और बाद में उन्होंने एक फार्मास्युटिकल वितरण कारोबार स्थापित किया था। कुछ ही समय बाद सुराणा ने पांच उत्पादों के साथ एक दवा कंपनी खोली और चेन्नई में कारखाना स्थापित किया।
डोलोपर उन पांच दवाओं में शामिल थी। लेकिन 1993 में कंपनी ने एक नए विचार के साथ 650 मिलीग्राम (एमजी) क्षमता में पैरासिटामोल को डोलो-650 ब्रांड के तहत बाजार में उतारा।
पैरासिटामोल का उपयोग दर्द निवारक, सूजन निवारक और बुखार के उपचार में किया जाता है। इसकी दो खुराक के बीच छह से आठ घंटे का अंतराल होना आवश्यक है। अन्यथा उसका दुष्परिणाम हो सकता है। उस दौरान बाजार में मौजूद पैरासिटामोल ब्रांड की क्षमता 500 एमजी होती थी। अधिक बुखार के दौरान 500 एमजी पैरासिटामोल से कोई खास राहत नहीं मिलती थी और रोगी को छोटे अंतराल पर दो खुराक लेनी पड़ती थी जिसका दुष्परिणाम हो सकता था। इसलिए डोलो-650 डॉक्टरों और ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई।