कच्चे तेल, गेहूं, दूध, और पाम ऑयल की कीमतों में गिरावट या इनके स्थिर रहने से दैनिक उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी) कंपनियों ने राहत की सांस ली है।
इन कंपनियों के लिए नया सिरदर्द बनीं पैकेजिंग कीमतों में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता के कारण कमी आ सकती है। हालांकि उत्पादन लागत को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जहां पाम ऑयल की कीमतों में तकरीबन 40 फीसदी तक की गिरावट आई है वहीं गेहूं और दूध की कीमतें स्थिर हैं।
चीनी की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में 40 फीसदी तक की कमी आई है, वहीं गेहूं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों को कच्चे माल की कीमतें स्थिर रहने से कुछ राहत तो जरूर मिली है, लेकिन यह उद्योग भविष्य की मूल्य निर्धारण रणनीति को लेकर अभी भी मुश्किल का सामना कर रहा है।
अधिकांश कंपनियों ने यह संकेत दिया है कि बढ़ती उत्पादन लागत से उनका मार्जिन प्रभावित हुआ है वहीं कुछ अन्य का कहना है कि यदि मुद्रास्फीति दर ज्यों की त्यों बनी रहती है तो कीमतों में और इजाफा होगा। कई एफएमसीजसी कंपनियों ने कृषि वस्तुओं की कीमतों और पैकेजिंग लागत में बढ़ोतरी से निपटने के लिए या तो अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया है या फिर उत्पादों का आकार घटाया है।
क्रूड ऑयल डेरिवेटिव का इस्तेमाल शैम्पू की पैकेजिंग में किया जाता है वहीं पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक उत्पाद पीईटी का इस्तेमाल हेयर ऑयल की बोतलों के निर्माण और डिब्बाबंद पानी की बोतलों में किया जाता है। कॉरूगेटेड बॉक्स की कुल लागत में क्रूड ऑयल डेरिवेटिव की भागीदारी तकरीबन 17 फीसदी है। इधर साबुन और शैम्पू जैसे उत्पादों के लिए मांग में गिरावट देखी गई है।
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के कार्यकारी निदेशक एवं अध्यक्ष एच. के. प्रेस ने कहा, ‘कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जानी अभी बाकी है। कुछ खास श्रेणियों के विकास पर प्रभाव पहले ही दिख चुका है।’ इस उद्योग के जानकारों का मानना है कि खाद्य एवं पेय पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन सौन्दर्य प्रसाधन जैसी श्रेणियां कीमतों में बढ़ोतरी से प्रभावित हो सकती हैं।
एफएमसीजी का विकास मौजूदा समय में मूल्य से प्रेरित है मात्रा से नहीं। एंजेल ब्रोकिंग के विश्लेषक आनंद शाह कहते हैं, ‘मूल्य विकास यानी वैल्यू ग्रोथ जारी रहेगा, लेकिन वॉल्यूम ग्रोथ में अगली दो-तीन तिमाहियों में गिरावट आ सकती है।’
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का मानना है कि वित्तीय वर्ष के बाकी समय के लिए कीमतों में और इजाफा नहीं होगा। हालांकि कुछ कंपनियां अपने मार्जिन को सुरक्षित बनाने के लिए कीमतों में इजाफा कर सकती हैं। बढ़ती उत्पादन लागत से जूझ रही बिस्कुट निर्माता ब्रिटानिया अपने उत्पादों की कीमतों में 8-10 फीसदी तक का इजाफा करने की योजना बना रही है।
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष नीरज चंद्रा ने कहा, ‘पिछले साल से विभिन्न श्रेणियों में उत्पादन लागत में तकरीबन 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। यदि लागत में बढ़ोतरी का यह सिलसिला जारी रहा तो हम अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकते हैं।’