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मार्च तिमाही में लाभ 28 फीसदी बढ़ा, मगर वृद्धि‍ पहले से कम

Last Updated- December 11, 2022 | 6:32 PM IST

बैंकिंग समेत तमाम क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन की बदौलत भारतीय कंपनियों का लाभ जनवरी-मार्च 2022 की तिमाही में 28 फीसदी बढ़ा है। मगर यह वृद्धि दिसंबर तिमाही में हुई 30 फीसदी बढ़ोतरी के मुकाबले कम है। इस नमूने में शामिल कंपनियों की शुद्धबिक्री में वृद्धिभी दिसंबर तिमाही की तुलना में कम रही। बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में ऐसी 2,695 कंपनियां शामिल की गई हैं, जिनके नतीजों की तुलना की जा सकती है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में खुदरा अनुसंधान के प्रमुख दीपक जसानी ने कहा कि मार्च तिमाही में आमदनी में अच्छी वृद्धिहुई, लेकिन यह दिसंबर तिमाही जितनी अच्छी नहीं रही। उन्होंने कहा, ‘यह वृद्धिमहंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद रही है।’ उन्होंने कहा कि मार्च सीजन के हिसाब से भी बिक्री के लिए बेहतर तिमाही है।
कुल लाभ में प्रमुख क्षेत्रों का योगदान लगातार बना हुआ है। नमूने में कुल 75 क्षेत्र शामिल हैं। तीन क्षेत्रों ने पूरे नमूने के कुल शुद्ध लाभ में 41.9 फीसदी योगदान दिया। बैंक क्षेत्र ने 18.8 फीसदी योगदान दिया और सूचना प्रौद्योगिकी (सॉफ्टवेयर) का योगदान 11.9 फीसदी रहा। रिफाइनरियों ने कुल शुद्ध लाभ में 11.3 फीसदी योगदान दिया। नमूने के विश्लेषण में वित्तीय आंकड़ों को अलग रखकर शुद्धलाभ देखा जाए तो वृद्धिघटकर 19.1 फीसदी रही, जो  दिसंबर तिमाही में 21.3 फीसदी शुद्धलाभ से कम है।
विश्लेषकों के मुताबिक बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के कारण अच्छा प्रदर्शन किया है। मुंबई के मोतीलाल ओसवाल समूह की जून 2022 की भारत रणनीति रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कर्ज के एनपीए में तब्दील होने की घटनाओं, कर्ज लागत और एनपीए (फंसे कर्ज) अनुपात में कमी आने से निजी बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार आ रहा है। पुनर्गठित खातों में भी पिछली तिमाही की मुकाबले गिरावट आई है।’ यह रिपोर्ट शोध विश्लेषकों गौतम दुग्गड़ और देवेन मिस्त्री ने तैयार की है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस, गैस वितरण, अलौह धातु, रिफाइनरी, स्टील और खनन एवं खनिज उत्पादों जैसे चक्रीय क्षेत्रों के साथ ही वित्तीय क्षेत्र के मुनाफे में भी वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखा गया। जसानी ने कहा कि अच्छी बात यह रही कि कोविड महामारी की तीसरी लहर का आ​र्थिक गतिवि​धियों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता नहीं दिखा। अर्थव्यवस्था के खुलने पर निर्भर आतिथ्य जैसे प्रमुख क्षेत्र ने मार्च तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि कई कंपनियों पर उच्च उत्पादन लागत और ज्यादा पारिश्रमिक लागत का दबाव देखा गया लेकिन बेहतर परिचालन लाभ के कारण ऊंची लागत की काफी हद तक भरपाई हो सकती है।
जसानी ने कहा कि परिदृश्य अंतरराष्ट्रीय ब्याज दर और इस बात पर ​निर्भर करता है कि वैश्विक मंदी आती है या नहीं क्योंकि कई कंपनियां निर्यात पर निर्भर हैं।

First Published - June 2, 2022 | 1:08 AM IST

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