बढ़ती ब्याज दर की मार से इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों का मुनाफा मार्जिन लगातार कम हो रहा है।
सड़क, बिजली, बंदरगाह और हवाईअड्डों के निर्माण से जुड़ी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी), जीवीके ग्रुप जैसी दूसरी कं पनियों को कम मुनाफे से ही संतोष करना पड़ रहा है। बढ़ती ब्याज दर से बिल्ट, ऑपरेट और ट्रांसफर (बीओटी) जैसी परियोजनाओं पर असर पड़ेगा।
दरअसल इन परियोजनाओं के लिए वैरिएबल दरों पर ऋण दिया जाता है। ऐसी परियोजनाओं में ब्याज दर बढ़ने का सारा जोखिम डेवलपर पर ही रहता है। कुछ हफ्ते पहले ही एचसीसी ने बदरपुर एलीवेटिड फ्लाईओवर परियोजना की कुल लागत 550 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस परियोजना में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग और निर्माण सेवाओं पर लागत आएगी 494 करोड़ रुपये। जबकि 56 करोड़ रुपये ब्याज दर निर्माण के दौरान (आईडीसी) के लिए ही चुकाने होंगे। लेकिन ब्याज दर बढ़ने से आईडीसी में इजाफा तो होगा ही साथ में बल्कि एचसीसी की पूरी परियोजना की ब्याज दर भी बढ़ जाएगी।
परियोजना पर लगने वाला टोल कर निश्चित रकम से ज्यादा नहीं किया जा सकता है। दरअसल कुछ समय के लिए इस रकम को सीमित कर दिया जाता है। इस कारण कंपनी बढ़ चुकी ब्याज दर वसूल नहीं कर पाएगी। इंजीनियरिंग और निर्माण की कीमत भी निश्चित होती है। लेकिन इस्पात की कीमतों में बढ़ोतरी होने के साथ यह भी बढ़ जाती है।
चार महीने पहले बैंक 11-12 फीसदी की दर से ब्याज वसूल रहे थे। लेकिन अब यह ब्याज दर बढ़कर 14 फीसदी हो गई है। मुंबई की निर्माण कंपनी एचसीसी के मुख्य वित्त अधिकारी ने कहा, ‘अगर ब्याज दर ऐसे ही बढ़ती रही तो, हमारी परियोजनाओं की लागत और बढ़ जाएगी। महंगाई दर के 13 फीसदी तक पहुंचते ही ब्याज दरों में 1-1.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।’
जीवीके के मुख्य वित्त अधिकारी आईसेक जॉर्ज ने कहा, ‘जिस भी परियोजना के लिए हमने वैरिएबल ब्याज दर पर ऋण लिया हुआ है, उनकी लागत बढ़ जाएगी।’ कंपनी की कुछ सड़क और बिजली परियोजनाओं पर इसका असर पड़ेगा। अपनी गौतम पावर परियोजना के लिए कंपनी ने वैरिएबल ब्याज दर पर ऋण लिया है। जबकि कंपनी की जगरपाडू परियोजना पर बढ़ती ब्याज दर का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसके लिए कंपनी ने निश्चित ब्याज दर पर ऋण लिया है।
हवाईअड्डों पर दो रास्तों से कमाई होती है- पार्किंग और लैंडिंग शुल्क जो नियामक संस्था द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसके अलावा दुकानों और विज्ञापनों के जरिए भी कमाई होती है। दूसरे रास्ते से होने वाली कमाई 70 फीसदी तक हो सकती है जैसे कि हीथ्रो हवाई अड्डे के मामले में। जबकि मुंबई हवाईअड्डे के मामले में यह आंकड़ा 65 फीसदी ही है।