रियल्टी क्षेत्र के दाम बढ़ने के कारण ग्राहकों की बेरुखी झेल रहे मुंबई और दिल्ली में प्रॉपर्टी के बाजार में दिसंबर के अंत तक 15 से 20 फीसदी की कमी आने की संभावना है।
इसका कारण साल के अंत तक रियल्टी कंपनियों द्वारा नई बुकिं ग नहीं करना है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार इस साल के अंत तक 1 करोड़ वर्ग फीट जगह की नई आपूर्ति होने के कारण भी रियल्टी की कीमतों में कमी आएगी। आने वाले महीनों में मुंबई के मलाड, अंधेरी, नवी मुंबई, एनसीआर के गुड़गाव, ग्रेटर नोएडा, और गाजियाबाद में वाणिज्यिक जगह की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
जोंस लैंग लासाले मेघराज (जेएलएलएम) के अनुसार ‘पिछले नौ महीनों के भीतर प्रापर्टी बाजार में 10 से 15 फीसदी का सुधार देखा गया है। इस साल की पहली छमाही में देश के विभिन्न हिस्सों में वाणिज्यिक जगह की उपलब्धता में 5.5 और 6 फीसदी का अंतर देखा गया है। इस अंतर के साल के अंत 7.5 से 8 फीसदी तक पहुंच जाने की उम्मीद है।’
सेट्रंम ब्रोकिंग के रुपेश सखे का कहना है कि’इस समय प्रॉपर्टी बाजार में मुख्य समस्या मांग की अपेक्षा आपूर्ति का ज्यादा होना है। इसलिए खरीददार ने मिलने से मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार में 15 से 20 फीसदी की और एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में 20 से 25 फीसदी की कमी आ जाएगी।’
जेएलएलएम के शोध प्रमुख अभिषेक किरन गुप्ता का कहना है कि ‘वाणिज्यिक जगह की मांग में पहले से ही 25 फीसदी तक कमी आ चुकी है। अभी भी मांग में कमी और आपूर्ति में बढ़ोतरी लगातार जारी है। ऐसे में हम उम्मीद लगा सकते है कि अगले छह से नौ महीनों के बीच ही प्रॉपर्टी बाजार संतुलन की अवस्था में आ पाएगा।’
वाणिज्यिक जगह की मांग में कमी आने से और बाजार से निवेशकों के गायब होने के कारण डेवलपर्स कंपनियों को कीमतें कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मुंबई के दूसरी श्रेणी के व्यापारिक जिले बांद्रा कुर्ला में वाणिज्यिक प्रॉपर्टी का किराया 340-345 रुपये प्रति वर्ग फीट चल रहा है। जबकि कुछ दिनों पहले ही यह किराया 425-450 रुपये प्रति वर्ग फीट था।
मुंबई के लोवर परेल इलाकों में जगहों की बुकिंग 375-400 रुपये में शुरु हुई थी। जो अब घटकर 175-200 रुपये हो गई है। एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में 25 से 30 फीसदी निवेशकों की रुचि होने के बावजूद रियल्टी बाजार में कोई भी निवेशक पैसा लगाने को तैयार नहीं है। इसका कारण शेयर बाजार के गिरने और रियल्टी क्षेत्र में आई मंदी है। उपभोक्ताओं द्वारा मांग में कमी आने और रियल्टी कंपनियों द्वारा किराये में सुधार आने की संभावना के चलते प्रॉपर्टी खरीद ने की योजनाओं को टाल रहे हैं।