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किंगफिशर और सिंगापुर एयरलाइंस में शुरू हो गई रेस

Last Updated- December 07, 2022 | 7:00 PM IST

पिछले कई दशकों से भारत और सिंगापुर के बीच में यात्रा करने वाले बिजनेस और प्रथम श्रेणी के यात्रियों का लगभग 70 फीसदी हिस्से पर सिंगापुर इंटरनेशनल एयरलाइंस (एसआईए) का नियंत्रण रहा है।


लेकिन विजय माल्या की विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस 18 सितंबर से मुंबई से द्वीप के लिए रोजाना उड़ान भरने वाली है। विमानन कंपनी के इस कदम ने एसआईए को भी भारत-सिंगापुर के लिए अधिक उड़ानों और छूट बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है।

किंगफिशर एसआईए के अधिक मार्जिन वाले कारोबार और प्रथम श्रेणी के यात्रियों में विशेष ए330 और प्रीमियम सेवाओं में सेंध लगाने की कोशिश में है। किंगफिशर एयरलाइंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा, ‘हम इस मार्ग पर आकर्षक उत्पादों के साथ प्रीमियम भारतीय विमानन कंपनी के रूप में खुद को बाजार में मजबूती दिला रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हम इस बात से परिचित हैं कि यहां पर सिंगापुर एयरलाइंस जैसी सालों से उड़ान भरने वाली विमानन कंपनियां हैं और उनकी इसमें मजबूत पकड़ भी है। लेकिन हमें आकर्षित उत्पादों के आकर्षित कीमतों पर मुहैया करने के चलते कारोबार मिलेगा।’ ए330 में 30 सीटें किंगफिशर फर्स्ट में और 187 सीटें किंग क्लास में होंगी (से सस्ती होंगी- किंगफिशर में बिजनेस क्लास नहीं है )।

प्रथम श्रेणी के यात्रियों के लिए उड़ान के दौरान खानसामे, पेशेवर बार-टेंडर, कोट इस्त्री कराने की सुविधा के साथ ही सीट मसाज के साथ बातचीत के लिए एक विशेष क्षेत्र की सुविधाएं दी जाएंगी। एसआईए पहले ही देसी विमानन कंपनी के इस कदम के जवाब के रूप में दिल्ली से सप्ताह में पांच सुबह की उड़ानों को बढ़ाने की बात कह चुकी है, जिसके साथ दिल्ली से सप्ताह में उड़ानों की संख्या बढ़कर 14 हो चुकी है।

सिंगापुर एयरलाइंस के महाप्रबंधक (भारत) फू चाई वू का कहना है, ‘हम बेंगलुरु से भी उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन यह इस साल के अंत तक संभव होगा।’ फू का कहना है, ‘हमारी इच्छा मुंबई की ही तरह चेन्नई और बेंगलुरु से हर रोज दो उड़ानें भरने की है। इसे देखते हुए हमें हैदराबाद जैसे मुख्य शहरों से भी उड़ानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि बाजार आगे भी विकास करेगा।’

सिंगापुर एयरलाइंस के एक अधिकारी का कहना है कि विमानन कंपनी ने अपनी नई उड़ानों के लिए दोतरफा इकोनॉमी किरायों में 33 प्रतिशत से 66 प्रतिशत के बीच में छूट की पेशकश दी है। इससे कीमतों में कड़ी टक्कर पैदा हो जाएगी, क्योंकि किंगफिशर को भी अपनी इकोनॉमी सीटों को भरना होगा। हालांकि किंगफिशर का कहना है कि कंपनी को कीमतों के दंगल में उतरने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन वह किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है।

पर्यटक कारोबार के विशेषज्ञों का कहना है कि किंगफिशर के लिए इस मार्ग पर उतरने का यह समय ठीक है, क्योंकि पर्यटन में लीजर सीजन शुरु होने वाला है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच में त्योहारों के मौके पर यात्रियों की संख्या में 40 प्रतिशत का इजाफा होता है।

First Published - August 27, 2008 | 11:09 PM IST

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