विमानन उद्योग भले ही उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा हो, लेकिन इस उद्योग ने निजी हवाई अड्डों के विकास के लिए उत्साहित रियल एस्टेट कंपनियों, फ्लाइंग अकादमियों और दिग्गज औद्योगिक घरानों को मायूस नहीं किया है।
सुपर एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, जनरल एविएशन एयरफील्ड ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, अनंत राज इंडस्ट्रीज आदर्श प्राइम प्रोजेक्ट्स और एयरो पोट्र्स ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने देश के विभिन्न इलाकों में हवाई अड्डे बनाने के लिए सरकार को अपने प्रस्ताव भेजे हैं।
इन इलाकों में पुडुचेरी का करैकाल, राजस्थान का पलाडी रामसिंहपुर, पुणे का सास्वद और गोवा का पेरनम शामिल हैं। इनके अलावा ग्वालियर के डाबरा में ग्वालियर एग्रीकल्चर कंपनी की ओर से हवाई अड्डा निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है जो मंत्रालय के विचाराधीन है। बंगाल एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (बीएपीएल) ने लुधियाना में हवाई अड्डा निर्माण के लिए एक प्रस्ताव भेजा है।
बीएपीएल दुर्गापुर में अपना पहला निजी हवाई अड्डा बना रहा है। इस होड़ में रिलायंस एयरपोर्ट डेवलपर्स जैसी बड़ी कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। रिलायंस एयरपोर्ट डेवलपर्स ने मध्य प्रदेश में सासन के पास सिंगरौली में एक हवाई अड्डा के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा है। हरियाणा के झार में एक कारगो एयरपोर्ट के अलावा यह कंपनी इस इलाके में 4,000 मेगावाट क्षमता की एक विद्युत परियोजना तैयार कर रही है।
अनंत राज इंडस्ट्रीज वाणिज्यिक निर्माण के अलावा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), होटल और आईटी पार्कों के निर्माण में भी लगी हुई है। इस कंपनी ने दो होटल और एक एसईजेड परियोजना के लिए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस एडीएजी से गठजोड़ किया है।
एक फ्लाइंग अकादमी चला रही राजस्थान एयरो स्पोट्र्स भी पलाडी-रामसिंहपुर में एक निजी हवाई अड्डा के निर्माण की योजना बना रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को कैप्टिव इस्तेमाल के लिए तैयार किए जाने वाले हवाई अड्डों के निर्माण के लिए पांच प्रस्ताव मिल चुके हैं। अन्य पांच प्रस्ताव उन हवाई अड्डों के निर्माण के लिए मिले हैं जिनका सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार ने हाल ही में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी की घोषणा की है जिसके तहत ऐसे प्रस्तावों को रखा जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से गठित एक संचालन समिति इन प्रस्तावों को जल्द से जल्द मंजूरी देगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘निजी इस्तेमाल के लिए बनाए जाने वाले हवाई अड्डों का आकार छोटा होगा, लेकिन सार्वजनिक इस्तेमाल वाले हवाई अड्डे मध्यम आकार के होंगे जो ए320 जैसे विमानों के संचालन में सक्षम होंगे।’ मंत्रालय की ओर से जारी एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया था कि ये प्रस्ताव विचार-विमर्श के विभिन्न चरणों से गुजर रहे हैं।
देश की सार्वजनिक क्षेत्र की हवाई अड्डा निर्माता एयरपोट्र्स ऑफ इंडिया (एएआई) भी करैकाल और डाबरा के लिए साइट्स का अनिवार्य निरीक्षण पहले ही कर चुकी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने पेरनम में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।
निजी हवाई अड्डों के अलावा महाराष्ट्र के चाकन और सिंधदुर्ग में हवाई अड्डों के लिए कई राज्य सरकारों के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।