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रिलायंस-बीपी को ईंधन का खुदरा कारोबार नहीं दिख रहा व्यावहारिक

Last Updated- December 11, 2022 | 6:46 PM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी के संयुक्त उद्यम-आरबीएमएल ने सरकार से कहा है कि भारत में निजी क्षेत्र के लिए ईंधन का खुदरा कारोबार अब आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया है। आरबीएमएल का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का ईंधन बाजार पर नियंत्रण है और वे पेट्रोल और डीजल का दाम लागत से नीचे ले आती हैं। इससे निजी क्षेत्र के लिए इस कारोबार में टिके रहना संभव नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने पहले नवंबर, 2021 से रिकॉर्ड 137 दिन तक पेट्रोल और डीजल के दाम को बरकरार रखा। उस समय उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पिछले महीने से फिर पेट्रोल, डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोक दिया गया है। यह सिलसिला अब 47 दिन से जारी है।
एक उच्चपदस्थ सूत्र ने संवाददाताओं से कहा, उन्होंने (रिलायंस बीपी मोबिलिटी लि.) ईंधन मूल्य के मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखा है। आरबीएमएल अपने खुदरा परिचालन में कटौती कर रही है जिससे हर महीने होने वाले नुकसान में कुछ  कमी लाई जा सके। कंपनी को पेट्रोल और डीजल की लागत से कम मूल्य पर बिक्री से हर महीने 700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
आरबीएमएल का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों का ईंधन के खुदरा बाजार के 90 फीसदी हिस्से पर कब्जा है और कीमतें तय करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में निजी कंपनियों के पास कीमत निर्धारण की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

First Published - May 24, 2022 | 12:39 AM IST

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