रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की 45वीं वार्षिक आम बैठक अगले कुछ सप्ताह में आयोजित होने वाली है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी अपने तेल से रसायन कारोबार (ओ2सी) को अलग करने की योजना को दोबारा आगे बढ़ाने की पहल कर सकती है। पिछले साल आरआईएल ने इसे टाल दिया था।
इसके अलावा आरआईएल अपने खुदरा एवं दूरसंचार कारोबार के लिए भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा कर सकती है। इन कारोबारों का संचालन फिलहाल अलग-अलग इकाइयों- जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल वेंचर्स के जरिये किया जाता है। उद्योग विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कंपनी अक्षय ऊर्जा के लिए भी अपनी योजनाओं की घोषणा कर सकती है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘आरआईएल ने पिछले साल अपने तेल से रसायन कारोबार को अलग करने की योजना को टालने का निर्णय लिया था। लेकिन मौजूदा अनुकूल परिदृश्य को देखते हुए कंपनी अब उस योजना पर दोबारा बिचार कर सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है लेकिन आपूर्ति किल्लत पर नजर बनी रहेगी। दूसरा, रिफाइंड उत्पादों के लिए वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ रही है।’
ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने पिछले सप्ताह कहा था कि आरआईएल दुनिया भर में रिफाइंड उत्पादों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है। ब्रोकरेज ने 16 जून को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘आरआईएल अपनी खरीद एवं आर्बिट्रेज बैरल की प्रॉसेसिंग क्षमता, डीजल-हैवी स्लैट और निर्यात केंद्रित होने के कारण वैश्विक स्तर पर स्थापित प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों में शामिल है। ‘
ब्रोकरेज केआर चोकसी के एमडी देवेन चोकसी ने कहा कि शेयरधारक खुदरा एवं दूरसंचार कारोबार के लिए कंपनी की योजनाओं के खुलासे का बेसव्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘शेयरधारक यह जानना चाहेंगे कि कंपनी दूरसंचार और खुदरा जैसे कारोबार के मूल्यांकन का खुलासा कब और किस प्रकार करती है।’
जेपी मॉर्गन ने 16 जून को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ऐसा लगता है कि कंपनी अपने दूरसंचार और खुदरा कारोबार की सूचीबद्धता के संबंध में किसी खास समय-सीमा का उल्लेख नहीं करेगी।
ब्रोकरेज ने कहा, ‘हालांकि तेल एवं सकल मार्जिन अधिक होना अच्छी बात है लेकिन हमारा मानना है कि वैश्विक प्रौद्योगिकी कारोबार की बिक्री से आरआईएल के उपभोक्ता मूल्यांकन (दूरसंचार एवं खुदरा दोनों के लिए) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। संभवत: अधिक प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) और खुदरा क्षेत्र में मौजूदगी बेहतर होने के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा कारेाबार एवं गैर-ऊर्जा कारोबार के मूल्यांकन में भी सुधार होना चाहिए।’
आरआईएल करीब 60 फीसदी राजस्व और 50 फीसदी एबिटा तेल से रसायन (ओ2सी) कारोबार से अर्जित करती है। इसमें रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल और खुदरा ईंधन कारोबार शामिल हैं।