बीएस बातचीत
डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख संदीप यादव ने ऐश्ली कुटिन्हो के साथ बातचीत में कहा कि मुद्रास्फीति में तेजी और अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा दर वृद्घि के बाद आरबीआई की दर वृद्घि का असर पहले ही महसूस किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि दर वृद्घि की मात्रा और अवधि मुद्रास्फीति की रफ्तार पर केंद्रित होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
आरबीआई द्वारा 40 आधार अंक रीपा दर और 0.5 प्रतिशत तक सीआआर बढ़ाने की ताजा घोषणा को आप कैसे देखते हैं?
मुद्रास्फीति में तेजी और अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा दर वृद्घि के बाद आरबीआई का यह कदम संभावित था। यह एक रक्षात्मक कदम है, भले ही कुछ हद तक आश्चर्यजनक एवं अचानक लिया गया फैसला था। हमें निश्चित तौर पर प्रतिफल और सख्त होने तथा आरबीआई द्वारा दरों में इजाफा किए जाने का अनुमान है। दर वृद्घि की मात्रा और अवधि मुद्रास्फीति की रफ्तार पर आधारित होगी। मेरा मानना है कि मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी जिससे आरबीआई के लिए दर वृद्घि जरूरी हो गई है।
भारत का 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल पिछले कुछ सप्ताहों में 7 प्रतिशत से ऊपर पहुंचा है। इसकी आगामी राह के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
7 प्रतिशत के स्तर से ऊपर 10 वर्षीय बेंचमार्क का बढऩा सामान्य है और इसे अस्थिरता का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। अंतर्निहित वृहद आर्थिक आंकडा काफी खराब रहा है और बॉन्ड प्रतिफल का आंकड़े पर असर दिखा है। मुझे प्रतिफल और सख्त होने का अनुमान है। दरअसल भारत का 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल मौजूदा स्तरों के मुकाबले ऊंचा बना रहा, वैश्विक वित्तीय संकट, नोटबंदी और कोविड-19 से जुड़ी कुछ अवधियों को छोड़कर।
मुद्रास्फीति में वृद्घि पर आपका क्या नजरिया है?
इसके लिए कुछ हद तक तर्क पेश किा जा सकता है कि भारत की मुद्रास्फीति खाद्य और ईंधन कीमतों पर आधारित है। जहां यह सही हो सकता है, बशर्ते कि मुद्रास्फीति एक समान बनी रहे। हालांकि आपूर्ति-आधारित मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं की मुद्रास्फीति संबंधित उम्मीदें बढ़ा सकती है और मांग संबंधित महंगाई के जरिये बढ़ सकती है। आरबीआई की मई की मौद्रिक नीति समिति के कदम से यह तथ्य सामने आया है कि मुद्रास्फीति नियंत्रित की जा सकेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि आरबीआई का उपभोक्ताओं की मुद्रास्फीति संबंधित उम्मीदों पर आधारित सर्वेक्षण को लेकर अगला कदम क्या होगा। लगातार ऊंचे आपूर्ति-केंद्रित मुद्रास्फीति जोखिम ढांचागत मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकते हैं।
वैश्विक तौर पर ब्याज दरों में बदलाव पर आपका क्या नजरिया है। क्या भारत से विदेशी पूंजी की निकासी तेजी होगी?
वैश्विक तौर पर, ब्याज दरें लगातार बढ़ सकती है, भले ही मंदी की आशंका दीर्घावधि के प्रतिफल में तेजी को सीमित कर सकती है। मुझे डेट योजनाओं से विदेशी पूंजी की निकासी की आशंका नहीं है, क्योंकि मौजूदा डेट होल्डिंग पहले से ही निचले स्तर पर है। इक्विटी में हम पूंजी निकासी दर्ज कर रहे हैं। पूंजी प्रवाह से ज्यादा मैं विदेशी निकासी को लेकर चिंतित हूं।
निवेशकों को मौजूदा समय में किस तरह की डेट योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए?
समय रहते निवेशकों को अल्पावधि की योजनाओं (जैसे एक साल) में निवेश बनाए रखने पर जोर देना चाहिए। जहां प्रतिफल की राह अभी भी गहरी बनी हुई है और लंबी अवधि की परिपक्वताओं ने ज्यादा प्रतिफल दिया है, वहीं बाजार अस्थिर हैं। हालांकि ज्यादा समय तक निवेश बनाए रखने से प्रतिफल में तेजी से बचने में मदद नहीं मिल सकेगी। भले ही प्रतिफल ही राह सपाट बनी रह सकती है, लंबी अवधि के निवेशकों को संक्षिप्त अवधि में निवेश बनाए रखना चाहिए। हमने आरबीआई द्वारा अभी सिर्फ एक दर वृद्घि दर्ज की है। इसे लेकर इंतजार करना और देखना उचित होगा कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा कैसा है और आरबीआई का कदम क्या है। प्रतिफल को लेकर निकट भविष्य में किसी तरह की नरमी की उम्मीद नहीं दिख रही है। बेहतर यही है कि निवेशक जल्दबाजी बरतने के बजाय धैर्य से काम लें।