भारती समूह के उपक्रम वनवेब द्वारा रविवार को यहां 36 संचार उपग्रह प्रक्षेपण के अवसर पर उपग्रह सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन प्रमुख विषय के रूप में सामने आया। प्रक्षेपण के बाद भारती इंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में दोहराया कि उपग्रह सेवाओं के मामले में स्पेक्ट्रम नीलामी का कोई अर्थ नहीं है।
मित्तल ने कहा ‘यह (उपग्रह सेवाएं) मोबाइल सेवाओं के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर रही हैं, जहां आप नीलामी को सही ठहरा सकते हैं। कुछ सामने आना चाहिए, जो काम करे, अन्यथा भारत संभावित रूप से उपग्रह सेवाओं के संबंध में चूक जाएगा।’
मित्तल ने कहा कि यह इरादा नहीं हो सकता। इस क्षेत्र के उद्योग की कंपनियों के अनुसार नीलामी तंत्र के जरिये स्पेक्ट्रम आवंटन से ऐसे हालात पैदा हो जाएंगे, जहां उपयोग एक ही कंपनी तक सीमित रह सकता है, जिससे लोगों को ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के डिजिटल इंडिया रोडमैप पर असर पड़ सकता है।
भारत में एमेजॉन प्रोजेक्ट कुइपर और भारती इंटरप्राइजेज वनवेब के जरिये उपग्रह के माध्यम से इंटरनेट प्रदान करने का लक्ष्य बना रही हैं। टेलसैट और एलोन मस्क की स्टारलिंक जैसी अन्य परियोजनाएं भी भारतीय बाजार के लिए उत्सुक थे।
मित्तल ने वनवेब के मौके, जो संयोग से उनका 65वां जन्मदिन भी है, से इतर कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को अलग रखा गया है। वे (सरकार) इसका आवंटन कैसे करेंगे, यह देखने की आवश्यकता है – या तो यह प्रशासनिक आवंटन के माध्यम से होगा या फिर नीलामी के माध्यम से।
अगर इसकी नीलामी की जाती है, तो यह उस तर्ज पर नहीं हो सकता है, जो हमने वैश्विक रूप में देखा था, क्योंकि कारोबार का मामला काफी छोटा है। आप देश में 15 एकड़ के दो क्षेत्रों की सेवा के लिए 7,000 करोड़ रुपये में 1,000 मेगाहर्ट्ज नहीं रख सकते हैं।
दो वाणिज्यिक प्रक्षेपणों के मद्देनजर, जिसमें से एक रविवार को हुआ और दूसरा जनवरी 2023 में होगा, वनवेब ने इसरो के साथ 1,000 करोड़ रुपये का करार किया है। कंपनी अगले साल के मध्य तक बिजनेस-टु-बिजनेस आधार पर अपनी ब्रॉडबैंड सेवाएं देने पर विचार कर रही है।