ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज में हाल में शेयरधारिता पर हुई गलतियों ने बाजार नियामक की तरफ से लागू की गई नई व्यवस्था को केंद्र में ला दिया है, जिसमें पाबंदी की अवधि में किसी कंपनी के अंदरूनी व्यक्ति की तरफ से बिना किसी प्रयोजन के शेयरों की खरीद पर रोक है।
ग्लेनमार्क फार्मा की सहायक ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज 1,500 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने के बाद अगस्त 2021 में सूचीबद्ध हुई थी। सूचीबद्धता के बाद प्रवर्तक की शेयरधारिता कंपनी में 100 फीसदी से घटकर 82.84 फीसदी रह गई थी। आईपीओ के बाद न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के अनुपालन की खातिर तीन साल में प्रवर्तक को हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी पर लाना है। इस अवधि में प्रवर्तकों के अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति नहीं है।
हालांकि ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज के प्रवर्तकों की शेयरधारिता 82.84 फीसदी से बढ़कर 82.85 फीसदी हो गई। यह जानकारी एक्सचेंजों पर उपलब्ध शेयरधारिता के आंकड़ों से मिली। इसकी वजह प्रवर्तकों की तरफ से खुले बाजार से 7,800 शेयर खरीदा जाना है।
प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विस (एसईएस) के मुताबिक, प्रवर्तक अपनी कंपनी में अतिरिक्त हिस्सेदारी तभी ले सकते हैं जब उनकी शेयरधारिता 75 फीसदी से नीचे जाए अन्यथा यह सेबी के सब्सटेंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स ऐंड टेकओवर्स नियमन का उल्लंघन है।
एसईएस ने कहा, इस मामले में प्रवर्तक (ग्लेनमार्क फार्मा व ग्लेन मारियो सल्ढाना) के पास पहले से ही 82.84 फीसदी हिस्सेदारी है और सल्ढाना ने नवंबर 2021 में बपाजार से 7,800 शेयर (0.01 फीसदी) खरीद लिए। ऐसे अधिग्रहण और कानून के उल्लंघन के क्या परिणाम होते हैं? सेबी के नियमन में दो ही जरिये हैं – खुली पेशकश या सेबी की तरफ से छूट।
एसईएस ने कहा, चूंकि काफी कम शेयर खरीदे गए हैं, ऐसे में यह बिना किसी प्रयोजन के किया गया उल्लंघन है। लेकिन सेबी का नियम ऐसी गड़बड़ी पर मौन है।
एसईएस के मुताबिक, हिस्सेदारी में बढ़ोतरी सबसे पहले 27 जनवरी, 2022 को बीएसई डिस्क्लोजर के तहत सार्वजनिक शेयरधारिता के तौर पर प्रतिबिंबित हुई और बाद में इसे सुधारकर प्रवर्तक शेयरधारिता शीर्षक कर दिया गया।
बिजनेस स्टैंडर्ड की तरफ से पूछे गए सवाल के जवाब में ग्लेमार्क लाइफ ने कहा कि उसने जरूरी खुलासा कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ये शेयर 2021 के आखिर में खरीदे गए थे और कानून के मुताबिक इसका खुलासा भी किया गया था।
सेबी ने ऐसे मामलों पर काबू पाने के लिए पिछले महीने नई व्यवस्था सामने रखी। यह व्यवस्था कंपनी इनसाइडर को शेयरों में खरीद-फरोख्त से रोकता है जब उन्हें इसकी अनुमति न हो। यह डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर पाबंदी सूची में डालने के जरिए किया गया।