अमेरिकी टेक दिग्गज ओरेकल जुर्माने के तौर पर 2.3 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी। प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) का कहना है कि कंपनी ने अवैध तरीके से आरक्षित कोष का इस्तेमाल भारत, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की में अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए किया।
ओरेकल के प्रवक्ता माइकल एगबर्ट ने ईमेल के जवाब में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘एसईसी द्वारा अपनाया गया आचरण हमारे मूल्यों और नीतियों के विपरीत है, और यदि हम ऐसे व्यवहार की स्पष्ट तौर पर पहचान करते हैं तो हम उचित कदम उठाएंगे।’ एसईसी ने कहा है कि ओरेकल इंडिया के कर्मचारियों ने रेल मंत्रालय के स्वामित्व वाली परिवहन कंपनी के साथ एक सौदे के संबंध में अत्यधिक डिस्काउंट से जुड़ी योजना का इस्तेमाल किया।
नियामक ने कहा है, ‘एसईसी ने घोषणा की कि ओरेकल कॉरपोरेशन को आरोपों के समाधान के लिए 2.3 करोड़ डॉलर से अधिक राशि चुकानी होगी, क्योंकि उसने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट (एफसीपीए) के प्रावधानों का उल्लंघन किया, जब तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, और भारत में उसकी सहायक इकाइयां गठित की गईं और उसने 2016 से 2019 के बीच व्यवसाय के बदले विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए अवैध कोष का इस्तेमाल किया। ‘
उसने कहा है, ‘2019 में, ओरेकल इंडिया के बिक्री कर्मचारियों ने भी परिवहन कंपनी से जुड़े सौदे के संबंध में अत्यधिक डिस्काउंट योजना का इस्तेमाल किया था। इस कंपनी पर ज्यादातर स्वामित्व भारतीय रेल मंत्रालय का था।’
यह दूसरी बार है जब ओरेकल पर इस तरह का जुर्माना लगाया गया है। वर्ष 2012 में, कंपनी ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट (एफसीपीए) के आरोपों को निपटाने के लिए एसईसी को 20 लाख डॉलर का भुगतान किया था। 2012 का मामला भी भारत में कंपनी की गतिविधि से जुड़ा हुआ था।