देश में तैयार किया गया सर्वाइकल कैंसर टीका नवंबर तक उपलब्ध हो सकता है। दरअसल पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) अपने क्वाड्रिवैलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस (क्यूएचपीवी) टीके को लॉन्च करने के लिए कमर कस रही है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अपने जोखिम पर स्टॉक तैयार करना शुरू कर दिया है हालांकि उसे देश के दवा नियामक से मंजूरी का भी इंतजार है। फिलहाल, भारत के पास बाजार में उपलब्ध एचपीवी टीके हैं लेकिन ये सभी विदेशी निर्माताओं ने तैयार किए हैं मसलन मर्क द्वारा तैयार किए गए गार्डासिल, ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन का टीका सेर्वरिक्स आदि। इस जगह में एसआईआई के प्रवेश से कीमतों में काफी कमी आने की उम्मीद है। फिलहाल एचपीवी टीके की लागत 2,000-3,000 रुपये प्रति खुराक है।
एसआईआई जल्द ही नियामक से टीके की मार्केटिंग की मंजूरी मांगेगी। हालांकि, क्यूएचपीवी तैयार करने की प्रक्रिया में लगभग चार से पांच महीने लगते हैं इसलिए टीका निर्माता ने टीके बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। एक करीबी सूत्र ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य नवंबर के करीब क्यूएचपीवी टीका लॉन्च करना है। यह निश्चित रूप से दवा नियामक की मंजूरी पर निर्भर करता है।’ एसआईआई का क्यूएचपीवी टीका पैपिलोमा वायरस के कई सीरोटाइप से बचाव के लिए वायरस जैसे कणों (वीएलपी) तकनीक का इस्तेमाल करता है और कंपनी को उम्मीद है कि यह लगभग 90 प्रतिशत मानव पैपिलोमा वायरस के बचाव में मददगार साबित होगा। दिसंबर 2020 में एसआईआई द्वारा लॉन्च किए गए निमोनिया के टीके के बाद, एचपीवी टीका इसका पहला प्रमुख गैर-कोविड-19 टीका होगा। एसआईआई ने दिसंबर में अपने कोविशील्ड टीके का उत्पादन रोक दिया था। इसकी हर महीने 25 करोड़ टीके की खुराक तैयार करने की क्षमता है। इसे हाल ही में अपने कोविड-19 टीके कोवोवैक्स के लिए 12-17 वर्ष के बच्चों में इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है। एचपीवी के अलावा, एसआईआई जल्द ही मलेरिया का टीका भी लॉन्च करेगा। इसे उम्मीद है कि उसके मलेरिया के टीके का उत्पादन साल के अंत में शुरू हो जाएगा। एक सूत्र ने कहा, ‘यह अब अफ्रीका में तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण में शामिल है और 2023 तक इस टीके का लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इसीलिए, एसआईआई में इस साल के अंत तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।’
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने आर21 / मैट्रिक्स-एम बनाने के लिए एसआईआई के साथ भागीदारी की है। एसआईआई लाइसेंस के बाद हर साल इस टीके की 20 करोड़ से अधिक खुराक की आपूर्ति करेगा। एसआईआई के प्रतिद्वंद्वी भारत बायोटेक (जीएसके के साथ साझेदारी के माध्यम से) और जायडस लाइफसाइंसेज भी मलेरिया के टीकों को बाजार में ला रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2020 में दुनिया भर में अनुमानित स्तर पर मलेरिया के 24.1 करोड़ मामले थे और 627,000 लोगों की मौत हुई। अफ्रीका के क्षेत्र में वैश्विक मलेरिया का बोझ असमान रूप से अधिक है जहां 95 प्रतिशत मलेरिया के मामले और मलेरिया से होने वाली 96 फीसदी मौत (2020 में) का आंकड़ा भी शामिल है। इस प्रकार, इस टीके की वैश्विक मांग अधिक होने की उम्मीद है।