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DXC विवाद में TCS को झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई, कंपनी पर बढ़ा 7 करोड़ डॉलर का बोझ

कंपनी ने मंगलवार को नियामकीय सूचना में कहा कि वह पहले ही 15 करोड़ डॉलर की रा​शि का प्रावधान कर चुकी है और बाकी राशि हर्जाने, ब्याज और कानूनी खर्च के लिए होगी

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अविक दास   
Last Updated- June 16, 2026 | 11:55 PM IST

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कहा है कि वह वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान करेगी। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने डीएक्ससी टेक्नॉलजी के साथ व्यापार गोपनीयता विवाद में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उसकी समीक्षा याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कंपनी ने मंगलवार को नियामकीय सूचना में कहा कि वह पहले ही 15 करोड़ डॉलर की रा​शि का प्रावधान कर चुकी है और बाकी राशि हर्जाने, ब्याज और कानूनी खर्च के लिए होगी। यह प्रावधान एक बार के असाधारण व्यय के रूप में होगा।

यह फैसला साल 2019 में कंप्यूटर साइंसेज कॉर्प (सीएससी) के विवाद से जुड़ा है। सीएससी अब डीएक्ससी का हिस्सा है। उस समय आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने लगभग 2,200 ट्रांसअमेरिका के कर्मचारियों को अपनी ओर कर लिया और एक प्रतिस्पर्धी जीवन बीमा सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बनाने के लिए गोपनीय सॉफ्टवेयर डेटा तक उनकी पहुंच का फायदा उठाया। इस मुकदमे में टीसीएस पर ट्रांसअमेरिका के कर्मचारियों को दी गई सॉफ्टवेयर तक पहुंच का फायदा उठाने का आरोप लगाया गया था, जिन्हें 2 अरब डॉलर के सौदे में टीसीएस को स्थानांतरित किया गया था।

साल 2023 में एक पीठ ने फैसला सुनाया कि टीसीएस ने जानबूझकर व्यापार गोपनीयता का दुरुपयोग किया। अदालत ने 21 करोड़ डॉलर का हर्जाना सुनाया। इसे बाद में साल 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने घटाकर कर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया। पिछले साल 5वें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने इसे बरकरार रखा था।

टीसीएस ने पिछले साल इस फैसले की समीक्षा और इसके खिलाफ अपील का फैसला किया था। कंपनी ने कहा कि ‘अदालत ने पहले दिए गए रोक के आदेश को रद्द कर दिया है और अमेरिका की जिला अदालत, नॉर्दन डिस्ट्रिक्ट ऑफ टेक्सस, डलास डिवीजन को निर्देश दिया कि वह अपील कोर्ट के निर्देशों के आधार पर रोक के आदेश पर फिर से विचार करे।’

लेकिन अब जब शीर्ष अदालत ने फैसले की समीक्षा नहीं करने का फैसला किया है और टीसीएस की याचिका खारिज कर दी है, तो कंपनी के पास राशि का भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

First Published : June 16, 2026 | 11:45 PM IST